भारत में प्याज ने निकाले आंसू, तजाकिस्तान में लोग सालभर में खाते हैं करीब 57 किलो! जानिए प्याज का ये दिलचस्प कनेक्शन
भारत में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। वहीं, मध्य एशिया के देश तजाकिस्तान में प्रति व्यक्ति सालाना प्याज की खपत करीब 56.8 किलो है। यानी वहां एक व्यक्ति औसतन हर महीने लगभग 4.7 किलो प्याज खाता है।
भारत में प्याज की कीमतें इन दिनों आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ रही हैं। देश के कई हिस्सों में प्याज का खुदरा भाव 50-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। 24 अगस्त 2026 को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 43.53 रुपये प्रति किलो थी, जो एक साल पहले के 27.37 रुपये प्रति किलो से लगभग 59% ज्यादा है।
लेकिन प्याज को लेकर दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां इसकी खपत सुनकर आप हैरान हो सकते हैं। तजाकिस्तान में एक व्यक्ति सालभर में करीब 57 किलो प्याज खा जाता है।
तजाकिस्तान में 57 किलो प्याज की खपत
FAOSTAT के आंकड़ों के आधार पर उपलब्ध डेटा के मुताबिक, 2023 में तजाकिस्तान में प्रति व्यक्ति प्याज की खपत 56.8 किलो थी। यह आंकड़ा देश को प्रति व्यक्ति प्याज खपत के मामले में दुनिया में सबसे ऊपर रखता है।
यानी औसतन एक व्यक्ति सालभर में करीब 57 किलो प्याज खाता है। इसे महीने के हिसाब से देखें तो यह लगभग 4.7 किलो प्याज प्रति व्यक्ति प्रति माह बैठता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि “per capita consumption” एक राष्ट्रीय औसत है। इसका मतलब यह नहीं कि हर तजाक नागरिक व्यक्तिगत रूप से ठीक 57 किलो प्याज खाता है।
प्याज से तजाकिस्तान का पुराना रिश्ता
प्याज कोई नया खाद्य पदार्थ नहीं है। इंसान हजारों वर्षों से इसकी खेती और इस्तेमाल करता रहा है। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, प्याज की खेती और चयनित प्रजनन कम से कम 7,000 वर्षों से किया जा रहा है। इसके शुरुआती उद्गम को लेकर वैज्ञानिकों में पूरी तरह एक राय नहीं है, लेकिन पश्चिमी और मध्य एशिया को इसके संभावित शुरुआती क्षेत्रों में माना जाता है।
तजाकिस्तान मध्य एशिया का हिस्सा है और इस पूरे क्षेत्र में कृषि और खान-पान की परंपराएं हजारों वर्षों से विकसित होती रही हैं।
यही वजह है कि प्याज वहां के भोजन और कृषि संस्कृति में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है।
भारत में क्यों महंगा हुआ प्याज?
अब सवाल भारत का है—आखिर जब देश में प्याज का उत्पादन इतना ज्यादा है, तो कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारत का प्याज उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। यानी कागज पर देश में उत्पादन की स्थिति कमजोर नहीं है।
लेकिन इस साल कहानी सिर्फ उत्पादन की नहीं है।
बारिश ने बिगाड़ा प्याज का गणित
रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश के कारण रबी प्याज की फसल में नमी बढ़ गई। इसके बाद जून-जुलाई की गर्मी और उमस ने भंडारण के दौरान प्याज के सड़ने की समस्या को बढ़ा दिया।
अनुमान है कि सामान्य तौर पर जहां करीब 25% प्याज खराब होता है, इस साल नुकसान 35-40% तक पहुंच गया। इसका मतलब बड़ी मात्रा में प्याज बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध ही नहीं रह पाया।
यही वजह है कि देश में कुल उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ा।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के दौरान मौसमी तेजी आम बात है।
सरकार के मुताबिक, इस दौरान त्योहारी मांग, सप्लाई चेन और मौसम से जुड़े कारण कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इस साल इन कारकों के साथ भंडारण में हुए नुकसान ने भी बाजार पर असर डाला है।
सरकार ने निकाला ‘कांदा एक्सप्रेस’
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है।
इसके लिए महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘Kanda Express’ नाम से विशेष रेल परिवहन का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने दिल्ली समेत कई शहरों में प्याज को 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने की व्यवस्था भी शुरू की है।
सरकार के पास 2026-27 के लिए प्याज का बफर स्टॉक बनाने का लक्ष्य भी है। 26 अगस्त तक उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, करीब 1.21 लाख टन प्याज बफर के लिए खरीदा जा चुका था।
किसानों के लिए भी आसान नहीं है प्याज की कहानी
प्याज की बढ़ी कीमत का फायदा हमेशा किसान को नहीं मिलता। प्याज की खेती में मौसम, भंडारण और बाजार भाव तीनों बड़ी भूमिका निभाते हैं।
इस साल बारिश और भंडारण में नुकसान से किसानों की लागत पर भी असर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों का कहना है कि उन्हें बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए बेहतर थोक कीमत की जरूरत है।
यानी उपभोक्ता महंगे प्याज से परेशान हैं, जबकि किसान भी लागत और कीमतों के बीच फंसा हुआ है।
भारत बनाम तजाकिस्तान—प्याज की दिलचस्प तस्वीर
भारत दुनिया के सबसे बड़े प्याज उत्पादकों में शामिल है, लेकिन मौजूदा समय में यहां प्याज की कीमतें उपभोक्ताओं को परेशान कर रही हैं।
दूसरी ओर, तजाकिस्तान में प्याज खान-पान का बेहद अहम हिस्सा है और प्रति व्यक्ति सालाना खपत करीब 56.8 किलो है।
इस तुलना से प्याज की एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है—एक देश में प्याज कीमतों की वजह से चर्चा में है, तो दूसरे में इसकी भारी खपत इसे खास बनाती है।
आखिर प्याज इतना खास क्यों है?
प्याज दुनिया के सबसे पुराने खेती किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है। हजारों वर्षों से इसका इस्तेमाल खाना पकाने, स्वाद बढ़ाने और अलग-अलग पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता रहा है।
भारत में भी प्याज लगभग हर घर की रसोई का अहम हिस्सा है। सब्जी से लेकर दाल, सलाद, चटनी और स्ट्रीट फूड तक—प्याज की मौजूदगी इतनी आम है कि इसकी कीमत बढ़ते ही उसका असर सीधे घरेलू बजट पर दिखाई देता है।
यही वजह है कि भारत में प्याज के बढ़ते दाम सिर्फ एक सब्जी की कीमत का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की रसोई से जुड़ा सवाल बन जाते हैं।
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