'आंखों की 85% रोशनी गई, सेहत बिगड़ी...' इमरान खान के बेटों के गंभीर आरोप, पाकिस्तान में तानाशाही का दावा
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर उनके बेटों सुलेमान और कासिम खान ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि जेल में उनके पिता की हालत बिगड़ रही है और पाकिस्तान लोकतंत्र से दूर होकर तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की सेहत को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जेल में बंद इमरान खान के बेटों सुलेमान खान और कासिम खान ने मंगलवार को एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने पिता की स्वास्थ्य स्थिति और जेल में उनके साथ किए जा रहे कथित व्यवहार को लेकर चिंता जताई।
कासिम खान ने कहा कि उनके पिता की हालत लगातार बिगड़ रही है और उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की स्थिति में उनके जेल में जीवित रहने को लेकर गंभीर आशंका है। उनके परिवार की ओर से लंबे समय से इमरान खान के स्वास्थ्य और उनकी मेडिकल देखभाल को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
85% आंखों की रोशनी जाने का दावा
इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी को लेकर विवाद इस साल की शुरुआत से ही सामने आता रहा है। फरवरी 2026 में उनके वकील ने पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनकी दाहिनी आंख की लगभग 85 फीसदी दृष्टि चली गई थी, यानी केवल करीब 15 फीसदी दृष्टि बची थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से उनकी आंखों की जांच कराने का निर्देश दिया था।
हालांकि, बाद में पाकिस्तान सरकार की ओर से कहा गया कि मेडिकल जांच के बाद उनकी आंखों की स्थिति में सुधार हुआ है और उन्हें तत्काल गंभीर उपचार की जरूरत नहीं पाई गई। सरकार ने परिवार और PTI की ओर से लगाए गए मेडिकल लापरवाही के आरोपों को भी खारिज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल भेजने का दिया था आदेश
इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को उन्हें इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में मेडिकल जांच और उपचार के लिए ले जाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल में आंखों के विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट, जनरल फिजिशियन और इमरान खान के निजी डॉक्टर को शामिल करने का निर्देश भी दिया था।
लेकिन 20 अगस्त को इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया, जहां कुछ घंटों की मेडिकल जांच के बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। PTI और उनके परिवार ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने कदम का बचाव किया और कहा कि मेडिकल जांच पारदर्शी तरीके से की गई थी।
बेटों ने पाकिस्तान में तानाशाही का लगाया आरोप
इमरान खान के बेटे सुलेमान खान ने पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में सैन्य प्रभाव बढ़ रहा है और उनके पिता की गिरफ्तारी, कथित हिरासत और उनके साथ व्यवहार को व्यापक राजनीतिक तस्वीर से अलग नहीं देखा जा सकता।
सुलेमान ने पाकिस्तान के तानाशाही की ओर बढ़ने के सवाल पर स्पष्ट रूप से सहमति जताई। उनके अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने भी आरोप लगाया कि इमरान खान का मामला पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक अधिकारों के कमजोर होने का संकेत है। ये परिवार और उनके वकील के आरोप हैं, जिन्हें पाकिस्तान सरकार स्वीकार नहीं करती।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान के साथ दुर्व्यवहार, मेडिकल लापरवाही और लंबे समय तक एकांत कारावास में रखने के आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि इमरान खान को नियमित चिकित्सा सुविधा और मुलाकातों की अनुमति दी गई है और उनके मेडिकल रिकॉर्ड में ऐसी गंभीर बीमारी नहीं बताई गई है जिसके लिए तत्काल विशेष उपचार आवश्यक हो।
इस बीच, इमरान खान की बहन उज्मा खान ने सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। अदालत ने इस याचिका की सुनवाई 16 सितंबर 2026 को करने का फैसला किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के अस्पताल स्थानांतरण संबंधी आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया।
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में सजा हो चुकी है, जबकि वह और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं। सरकार इन आरोपों से इनकार करती है। मौजूदा स्वास्थ्य विवाद ने एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति, न्यायपालिका और सैन्य प्रभाव को लेकर बहस तेज कर दी है।
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