BRICS से भारत को क्या मिला? चिदंबरम के सवाल पर शशि थरूर ने गिनाए फायदे

BRICS Summit को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग नजरिए सामने आए हैं। पी. चिदंबरम ने हालिया BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाया, जबकि शशि थरूर ने BRICS को भारत की कूटनीतिक ताकत और ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया।

Sep 11, 2026 - 11:21
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BRICS से भारत को क्या मिला? चिदंबरम के सवाल पर शशि थरूर ने गिनाए फायदे

दिल्ली में होने वाले BRICS Summit से पहले कांग्रेस के भीतर ही संगठन के फायदे को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS से भारत को मिले “ठोस फायदों” पर सवाल उठाए, वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसके महत्व और भारत की कूटनीतिक भूमिका का बचाव किया।

शशि थरूर ने गिनाए BRICS के फायदे

BRICS Summit से पहले बोलते हुए शशि थरूर ने इसे Global South के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया।

उन्होंने कहा कि BRICS में 11 प्रमुख देश शामिल हैं, जो दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से और करीब 41 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं।

थरूर के मुताबिक, इतने बड़े समूह की मेजबानी करना अपने आप में भारत के लिए महत्वपूर्ण है और इससे दुनिया के सामने भारत की diplomatic convening power यानी विभिन्न देशों को एक मंच पर लाने की क्षमता प्रदर्शित होती है।

“समिट की मेजबानी हमारे लिए गर्व की बात”

शशि थरूर ने BRICS Summit की मेजबानी को भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया।

उनका कहना है कि BRICS देशों के अलावा अन्य देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेताओं का भारत आना देश की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, थरूर ने BRICS को लेकर सिर्फ फायदे ही नहीं गिनाए, बल्कि इसकी कुछ बड़ी चुनौतियों की ओर भी इशारा किया।

BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?

थरूर ने कहा कि BRICS के अलग-अलग सदस्य देशों के हित और वैश्विक मुद्दों पर उनकी राय कई बार एक-दूसरे से काफी अलग होती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर BRICS के विदेश मंत्री साझा बयान पर सहमत नहीं हो पाए थे।

ऐसी स्थिति में भारत को अध्यक्ष के तौर पर सभी देशों के बीच सहमति बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

व्यापार घाटे पर भी थरूर ने जताई चिंता

थरूर ने BRICS देशों के साथ भारत के व्यापार को लेकर भी एक महत्वपूर्ण चिंता सामने रखी।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन भारत के लिए स्थिति हर मामले में फायदेमंद नहीं है।

उनके मुताबिक, भारत का BRICS देशों को निर्यात कम हुआ है, जबकि आयात बढ़ा है, जिससे व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में नहीं है।

चिदंबरम ने उठाया था “ठोस फायदे” का सवाल

शशि थरूर की टिप्पणी से एक दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने हालिया BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस नतीजों पर सवाल उठाया था।

चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले कोई खास “tangible benefits” नजर नहीं आए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भारत BRICS के अलावा SCO, G20 और QUAD जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है, लेकिन इन मंचों से भारत को वास्तव में कितने ठोस फायदे मिले हैं।

BJP ने चिदंबरम पर साधा निशाना

चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। बीजेपी ने उनके सवालों को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा और आरोप लगाया कि पार्टी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को स्वीकार नहीं कर पा रही है।

ऐसे में BRICS Summit से पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बयान ने एक दिलचस्प बहस को जन्म दे दिया है।

एक तरफ चिदंबरम ठोस आर्थिक और रणनीतिक लाभ का हिसाब मांग रहे हैं, वहीं थरूर BRICS को भारत की कूटनीतिक पहुंच और ग्लोबल साउथ में नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या BRICS भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक प्रतिष्ठा का मंच है, या इससे देश को वास्तविक आर्थिक और रणनीतिक फायदे भी मिल रहे हैं?

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