दर्जी के बेटे से पायलट ट्रेनिंग तक… 9/11 को लेकर मोहम्मद अफरोज के दावे ने मचा दिया था हड़कंप
9/11 हमले के कुछ हफ्तों बाद मुंबई पुलिस ने मोहम्मद अफरोज नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, अफरोज ने अल-कायदा की साजिश से जुड़े होने और ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया में हमले की कथित योजनाओं के बारे में दावे किए थे। इन दावों की जांच के लिए भारत से टीमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया भेजी गईं, लेकिन जांच में आरोपों को साबित करने वाला पर्याप्त सबूत नहीं मिला।
11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के 25 साल बाद भी उस दौर की कई कहानियां लोगों को हैरान करती हैं। ऐसी ही एक कहानी मुंबई के युवक मोहम्मद अफरोज की है, जिसने 9/11 हमलों के बाद ऐसा दावा किया था, जिसने भारतीय जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया था।
अक्टूबर 2001 में मुंबई पुलिस को अफरोज के बारे में जानकारी मिली। जांच में सामने आया कि वह मुंबई के चीता कैंप इलाके से था और विदेश जाकर पायलट ट्रेनिंग ले चुका था।
दर्जी के बेटे की पायलट ट्रेनिंग ने उठाए सवाल
अफरोज का परिवार मुंबई के एक साधारण इलाके में रहता था और उसके पिता दर्जी का काम करते थे।
पुलिस के लिए सवाल यह था कि इतने सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार का युवक विदेश जाकर महंगी पायलट ट्रेनिंग कैसे हासिल कर पाया।
जांचकर्ताओं को शक हुआ कि उसकी ट्रेनिंग के पीछे किसी व्यक्ति या संगठन की आर्थिक मदद हो सकती है।
पुलिस को पता चला कि अफरोज भारत लौट चुका है। बाद में जांचकर्ताओं ने उसे नवी मुंबई के वाशी स्थित होटल एबॉट से ट्रेस किया और गिरफ्तार कर लिया।
9/11 साजिश से जुड़ा होने का दावा
मुंबई पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अफरोज ने दावा किया कि वह अमेरिका में हुए 9/11 हमलों की व्यापक साजिश से जुड़ा था।
11 सितंबर 2001 को 19 अल-कायदा आतंकियों ने चार विमानों का अपहरण किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए, तीसरा विमान पेंटागन से जा टकराया, जबकि चौथा विमान यात्रियों के विरोध के बाद पेंसिल्वेनिया के एक मैदान में गिर गया।
अफरोज के कथित दावों ने मुंबई पुलिस को एक संभावित अंतरराष्ट्रीय साजिश की जांच शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
ब्रिटिश संसद को निशाना बनाने की कथित योजना
पुलिस के अनुसार, अफरोज ने दावा किया था कि उसे ब्रिटिश संसद पर विमान से हमला करने वाली एक टीम का हिस्सा बनाया गया था।
कथित योजना के तहत उसे लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से मैनचेस्टर जाने वाली फ्लाइट को हाईजैक करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
हालांकि, अमेरिका में 9/11 हमले होने के बाद दुनिया भर के एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई और कथित तौर पर यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अफरोज ने यह भी दावा किया था कि उसे पायलट ट्रेनिंग के लिए आर्थिक मदद मिली थी और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एक व्यक्ति ने उसे आतंकवाद की ओर जाने के लिए प्रेरित किया था।
तीन देशों में पायलट ट्रेनिंग का दावा
अफरोज के कथित बयान में यह भी सामने आया कि उसने ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका में पायलट ट्रेनिंग लेने का दावा किया था।
उसने ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न की रियाल्टो टावर्स को निशाना बनाने की एक कथित योजना के बारे में भी पुलिस को जानकारी दी थी।
इन दावों की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच शुरू की।
अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची जांच
मुंबई पुलिस ने अफरोज के दावों की पुष्टि करने के लिए जांच टीमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया भेजीं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस समय के मुंबई पुलिस कमिश्नर एमएन सिंह भी जांच के सिलसिले में ब्रिटेन गए थे।
लेकिन लंबी जांच के बावजूद अफरोज के दावों को साबित करने वाला पर्याप्त सबूत सामने नहीं आया।
POTA के आरोप हटे और हुई रिहाई
अफरोज को शुरुआत में एक कथित लूट के मामले में हिरासत में लिया गया था। बाद में उस पर Prevention of Terrorism Act यानी POTA के तहत भी कार्रवाई की गई।
लेकिन जांच में ऐसा पर्याप्त सबूत नहीं मिल सका, जिसके आधार पर कथित अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश को अदालत में साबित किया जा सके।
बाद में उसके खिलाफ POTA के आरोप हटाने की मंजूरी दी गई और अफरोज को रिहा कर दिया गया।
अफरोज ने पुलिस पर लगाए थे झूठे फंसाने के आरोप
रिहाई के बाद अफरोज ने दावा किया कि पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया था और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप मनगढ़ंत थे।
इसके बाद उसने राजनीति में भी कदम रखा और अनुशक्ति नगर विधानसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उसे सफलता नहीं मिली।
मोहम्मद अफरोज की कहानी 9/11 के बाद भारत में हुई उन जांचों में से एक है, जिसमें एक युवक के दावों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच शुरू करवा दी थी।
हालांकि, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अफरोज द्वारा किए गए कथित दावों और जांच में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय जांच उसके दावों को पुष्ट करने वाला पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सकी।
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