शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के बीच सोना-चांदी के दाम बदले, जानिए आपके शहर में नए रेट
भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। निवेशकों की नजर अब सुरक्षित निवेश विकल्पों पर है। जानिए 24 कैरेट, 22 कैरेट सोने और चांदी के ताजा भाव तथा बाजार पर इसका असर।
सप्ताह की शुरुआत भारतीय निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही। एक ओर घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भी बड़ा बदलाव दर्ज किया गया। सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेज गिरावट के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर बढ़ता दिखाई दिया, हालांकि वैश्विक संकेतों और डॉलर की मजबूती के कारण कीमती धातुओं की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना रहा।
सोमवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार दबाव में खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 600 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
इसी दौरान सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के भाव में भी बदलाव देखने को मिला। ज्वेलर्स और बुलियन बाजार के अनुसार, 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में संशोधन किया गया, जबकि चांदी के दाम भी नए स्तर पर पहुंच गए। विभिन्न शहरों में टैक्स, मेकिंग चार्ज और स्थानीय मांग के कारण कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। निवेशकों को खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा रेट जरूर जांचने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में शेयर बाजार में गिरावट आने पर निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस समय वैश्विक स्तर पर कई ऐसे कारक सक्रिय हैं जो सोने और चांदी दोनों की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की उम्मीद और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद लंबे समय के निवेशकों के लिए सोना अब भी एक महत्वपूर्ण सुरक्षित निवेश माना जा रहा है।
चांदी की बात करें तो इसमें सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। चांदी की कीमतें केवल निवेशकों की मांग से ही नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग से भी प्रभावित होती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और ऑटोमोबाइल सेक्टर में उपयोग होने के कारण चांदी की कीमतों में तेजी और गिरावट दोनों अपेक्षाकृत अधिक होती है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी में तेज करेक्शन देखने को मिला है, हालांकि विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानते।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को मौजूदा अस्थिरता के दौरान घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। यदि आपका निवेश लंबी अवधि का है, तो केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव करना उचित नहीं होगा। इसी तरह सोना और चांदी खरीदने से पहले अंतरराष्ट्रीय संकेत, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी नजर रखना जरूरी है।
आज के ताजा बाजार अपडेट के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव दर्ज किया गया। 24 कैरेट सोने, 22 कैरेट सोने और प्रति किलोग्राम चांदी के नए रेट जारी किए गए हैं। हालांकि ये कीमतें दिनभर के कारोबार के दौरान मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार बदल सकती हैं। इसलिए खरीदारी या निवेश का निर्णय लेने से पहले अधिकृत ज्वेलर्स या बुलियन एसोसिएशन से नवीनतम दर की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और शेयर बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में कीमती धातुओं में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, यदि वैश्विक आर्थिक संकेत बेहतर होते हैं और निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार में लौटता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले सप्ताह निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
वित्तीय सलाहकारों की राय है कि निवेशकों को अपने कुल निवेश का एक सीमित हिस्सा ही सोने या चांदी जैसी कीमती धातुओं में रखना चाहिए। इससे पोर्टफोलियो में विविधता बनी रहती है और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के दौरान जोखिम को संतुलित करने में मदद मिलती है। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति आभूषण खरीदने की योजना बना रहा है, तो उसे केवल सोने की कीमत ही नहीं बल्कि मेकिंग चार्ज, जीएसटी और हॉलमार्किंग जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
फिलहाल, शेयर बाजार की कमजोरी और कीमती धातुओं की कीमतों में बदलाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार की दिशा अब वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। ऐसे माहौल में विशेषज्ञ जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।
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