ट्रंप के झटके के बावजूद IT शेयरों में तेजी, TCS-Infosys-HCLTech के शेयर चढ़े

अमेरिका में ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM प्रक्रिया पर कार्रवाई के बावजूद भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। TCS के मजबूत तिमाही नतीजों और निवेशकों के भरोसे ने बाजार को सहारा दिया।

Oct 9, 2026 - 11:50
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ट्रंप के झटके के बावजूद IT शेयरों में तेजी, TCS-Infosys-HCLTech के शेयर चढ़े

भारतीय IT शेयरों में तेजी से निवेशकों का ध्यान खींचा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से टेक्नोलॉजी कंपनियों पर की गई कार्रवाई के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में IT सेक्टर ने मजबूती दिखाई। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार के दौरान TCS, Infosys, HCLTech और Wipro समेत कई प्रमुख IT कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े प्रतिबंधों की खबर ने इस सेक्टर को लेकर चिंताएं बढ़ाई थीं, लेकिन इसके बावजूद शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य में कारोबार बढ़ने की संभावनाओं ने निवेशकों का ध्यान खींचा।

अमेरिकी फैसले से IT कंपनियों के सामने क्या चुनौती है?

अमेरिकी प्रशासन ने आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण PERM पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। प्रभावित कंपनियों में TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Cognizant जैसी भारतीय IT क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। Microsoft, Adobe और Capgemini के नाम भी इस मामले में सामने आए हैं। इस कदम से अमेरिका में कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया और भविष्य की भर्ती योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

हालांकि, PERM प्रक्रिया पर रोक का मतलब सभी भारतीय कर्मचारियों के अमेरिकी वीजा रद्द होना नहीं है। यह रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इसका प्रभाव संबंधित कंपनियों के आवेदनों, कर्मचारियों की स्थिति और प्रतिबंध की अवधि पर निर्भर करेगा। इसलिए इस फैसले को अमेरिकी बाजार में काम कर रही भारतीय IT कंपनियों के लिए एक संभावित चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

TCS के मजबूत नतीजों से IT सेक्टर को मिला सहारा

IT शेयरों में तेजी के पीछे TCS के तिमाही नतीजों को भी अहम माना जा रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 13,884 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 12,705 करोड़ रुपये था। कंपनी का समेकित राजस्व भी बढ़कर 74,525 करोड़ रुपये पहुंच गया। बेहतर वित्तीय प्रदर्शन ने निवेशकों के बीच कंपनी की कारोबारी क्षमता को लेकर भरोसा मजबूत किया।

TCS के नतीजों का असर पूरे IT सेक्टर की धारणा पर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयर में लगभग 3.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। वहीं, Infosys के शेयर करीब 2.62 प्रतिशत, HCLTech के 2.53 प्रतिशत और Wipro के 2.47 प्रतिशत तक चढ़े। हालांकि, शेयरों की कीमतों में कारोबार के दौरान बदलाव होता रहता है।

भारतीय IT कंपनियों पर कितना पड़ सकता है असर?

भारतीय IT कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी ग्राहकों और वैश्विक तकनीकी सेवाओं से आता है। ऐसे में अमेरिका के वीजा और रोजगार संबंधी नियमों में बदलाव का असर कर्मचारियों की तैनाती, भर्ती और परिचालन लागत पर पड़ सकता है। कंपनियों को अपनी कार्ययोजना में बदलाव करना पड़ सकता है, खासकर उन मामलों में जहां कर्मचारियों को लंबे समय तक अमेरिका में काम करने या स्थायी निवास हासिल करने की जरूरत होती है।

हालांकि, कंपनियां भारत से सेवाएं देने, स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की भर्ती करने और अपने वैश्विक डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत करने जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकती हैं। इन कदमों से कुछ चुनौतियों को कम किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकी नीतियों से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, इसकी गारंटी नहीं है।

आगे कैसी रह सकती है IT शेयरों की चाल?

फिलहाल IT शेयरों में आई तेजी यह दिखाती है कि निवेशक केवल अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि कंपनियों के मुनाफे, राजस्व वृद्धि और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को भी महत्व दे रहे हैं। मजबूत तिमाही नतीजों ने इस सेक्टर को सहारा दिया है, लेकिन आगे की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी।

अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलाव, वैश्विक कंपनियों का तकनीकी खर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश और IT कंपनियों की लागत आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि कंपनियां अपनी कमाई में वृद्धि बनाए रखती हैं, तो निवेशकों का भरोसा मजबूत रह सकता है। दूसरी ओर, रोजगार प्रक्रिया पर प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहने या उसका दायरा बढ़ने से बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।

इसलिए एक दिन की तेजी को IT सेक्टर की लंबी अवधि की मजबूती का संकेत मानने से पहले कंपनियों के आगामी नतीजों और अमेरिकी फैसले के वास्तविक प्रभाव पर नजर रखना जरूरी होगा।

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