Silver Price Crash: चांदी में बड़ी गिरावट, क्या ₹2 लाख से नीचे पहुंचेगा भाव? जानिए आज के ताजा रेट

सोने-चांदी की कीमतों में मंगलवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी के दाम में अचानक आई तेज कमजोरी के बाद निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या चांदी का भाव जल्द ही ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे फिसल सकता है।

Jul 28, 2026 - 15:03
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Silver Price Crash: चांदी में बड़ी गिरावट, क्या ₹2 लाख से नीचे पहुंचेगा भाव? जानिए आज के ताजा रेट

सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मंगलवार को घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पिछले कुछ दिनों से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रही चांदी में आई इस कमजोरी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में इसका भाव ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे भी पहुंच सकता है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी, मुनाफावसूली और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। यही वजह रही कि चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब पिछले कुछ महीनों में चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था और कई बार रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई थी।

जानकारों का कहना है कि जब किसी एसेट में लगातार तेजी देखने को मिलती है, तो एक समय के बाद निवेशक मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं। इससे कीमतों में अस्थायी गिरावट आना सामान्य माना जाता है। फिलहाल चांदी के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। हालांकि यह गिरावट लंबे समय तक रहेगी या केवल कुछ दिनों की करेक्शन है, इसका जवाब आने वाले कारोबारी सत्रों में मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं की चाल कई कारकों पर निर्भर करती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की मजबूती या कमजोरी, वैश्विक आर्थिक आंकड़े, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक मांग जैसे कई कारक सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। चूंकि चांदी का इस्तेमाल केवल निवेश के लिए ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोबाइल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में दबाव बना रहता है और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली जारी रहती है, तो चांदी की कीमतों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि कई विश्लेषकों का यह भी कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए हर गिरावट खरीदारी का अवसर भी साबित हो सकती है, क्योंकि चांदी की औद्योगिक मांग आने वाले वर्षों में मजबूत रहने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं, सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन, त्योहारों की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करेगी। यदि मांग मजबूत रहती है तो कीमतों में दोबारा तेजी लौट सकती है। दूसरी ओर, यदि वैश्विक बाजार से लगातार कमजोर संकेत मिलते हैं तो घरेलू बाजार में भी दबाव बना रह सकता है।

सोने की कीमतों में भी मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सोने में आई कमजोरी चांदी की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, इसलिए इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत सीमित रहता है। इसके विपरीत चांदी में निवेश और औद्योगिक मांग दोनों का असर होने के कारण इसकी चाल अधिक तेज रहती है।

निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या चांदी वास्तव में ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा होना पूरी तरह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी बिकवाली जारी रहती है और डॉलर मजबूत होता है, तो कीमतों में और गिरावट संभव है। लेकिन यदि फेडरल रिजर्व के फैसलों, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों या भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण निवेशकों का रुझान दोबारा कीमती धातुओं की ओर बढ़ता है, तो चांदी में तेजी भी लौट सकती है।

बाजार विश्लेषकों की सलाह है कि केवल एक दिन की गिरावट को देखकर जल्दबाजी में निवेश संबंधी निर्णय नहीं लेने चाहिए। कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोगों को वैश्विक संकेतों, घरेलू मांग, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखनी चाहिए। छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन लंबी अवधि का रुझान कई बड़े आर्थिक कारकों से तय होता है।

फिलहाल बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक, वैश्विक महंगाई के आंकड़ों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर बनी हुई है। इन कारकों से आने वाले दिनों में सोने और चांदी दोनों की कीमतों की दिशा तय हो सकती है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों के लिए यह समय बाजार की चाल पर नजर रखने और सोच-समझकर फैसला लेने का माना जा रहा है।

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