जन्म-मृत्यु पंजीकरण होगा पूरी तरह डिजिटल, देर से रजिस्ट्रेशन पर सख्त होंगे नियम; अमित शाह लोकसभा में पेश करेंगे नया बिल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 पेश करेंगे। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाना, राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड को मजबूत करना और दो साल से अधिक देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए नियमों को और सख्त करना है।

Jul 29, 2026 - 11:17
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जन्म-मृत्यु पंजीकरण होगा पूरी तरह डिजिटल, देर से रजिस्ट्रेशन पर सख्त होंगे नियम; अमित शाह लोकसभा में पेश करेंगे नया बिल

नई दिल्ली: देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 पेश करेंगे। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जोड़ना, राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत डेटाबेस तैयार करना और देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाना है।

सरकार का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र किसी भी नागरिक की पहली कानूनी पहचान होता है। इसी दस्तावेज के आधार पर शिक्षा, सरकारी योजनाओं, पासपोर्ट, मतदाता सूची और अन्य कई सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होती है। इसलिए जन्म और मृत्यु का समय पर तथा सही पंजीकरण सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

क्या है नए संशोधन का उद्देश्य?

प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य देशभर में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना है। सरकार चाहती है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड का एक समान डिजिटल प्रारूप हो, जिससे जानकारी का आदान-प्रदान तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय हो सके।

डिजिटल रिकॉर्ड होने से नागरिकों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और कई सरकारी सेवाओं में दस्तावेजों का सत्यापन भी आसान हो सकेगा।

देर से पंजीकरण के नियम होंगे सख्त

इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान देर से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ा है।

प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो केवल सामान्य प्रशासनिक अनुमति पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) की अनुमति आवश्यक होगी।

सरकार का मानना है कि इससे फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने, रिकॉर्ड में हेरफेर और गलत जानकारी दर्ज कराने जैसी संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

डिजिटल रिकॉर्ड से क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संशोधन लागू होता है, तो नागरिकों और प्रशासन दोनों को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है।

सबसे पहले, जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित डिजिटल डेटाबेस में उपलब्ध होंगे, जिससे दस्तावेजों के खोने या क्षतिग्रस्त होने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।

दूसरे, सरकारी विभागों के बीच डेटा साझा करना आसान होगा। इससे विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान, जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण और प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

इसके अलावा, भविष्य में नागरिकों को कई सेवाओं के लिए बार-बार जन्म प्रमाण पत्र की अलग-अलग प्रतियां जमा करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।

क्यों जरूरी माना जा रहा है यह बदलाव?

कई मामलों में जन्म या मृत्यु का पंजीकरण वर्षों बाद कराया जाता है। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड की सत्यता की जांच करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

देर से पंजीकरण के कारण कभी-कभी आयु, पहचान या पारिवारिक रिकॉर्ड से जुड़े विवाद भी सामने आते हैं। सरकार का कहना है कि सख्त प्रक्रिया अपनाने से ऐसे मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

संसद में होगी चर्चा

यह विधेयक लोकसभा में पेश होने के बाद सांसदों के बीच चर्चा के लिए रखा जाएगा। चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल अपने सुझाव और संशोधन भी दे सकते हैं। यदि विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तब यह कानून के रूप में लागू होगा।

नागरिकों पर क्या होगा असर?

यदि यह कानून लागू होता है, तो सामान्य परिस्थितियों में समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने वाले नागरिकों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और डिजिटल हो सकती है।

हालांकि जो लोग कई वर्षों बाद पंजीकरण कराना चाहते हैं, उन्हें अधिक सख्त कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने की सलाह देते हैं।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर और अधिक विश्वसनीय सेवा उपलब्ध कराना है। जन्म प्रमाण पत्र को कानूनी पहचान का आधार मानते हुए रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सरकार का यह भी मानना है कि डिजिटल डेटाबेस भविष्य में ई-गवर्नेंस को मजबूत करेगा और सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगा।

आगे क्या?

अब सभी की नजर लोकसभा में होने वाली चर्चा और विधेयक की आगे की संसदीय प्रक्रिया पर रहेगी। यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड, सख्त सत्यापन प्रक्रिया और देर से पंजीकरण के लिए न्यायिक मंजूरी जैसे प्रावधान प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में यह कानून नागरिक सेवाओं और सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन के तरीके को नई दिशा दे सकता है।

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