₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ, सरकार रखेगी नजर

15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा ₹2,000 से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि यह चार्ज ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। सरकार ने कहा है कि वह पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ मिलकर निगरानी करेगी, ताकि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें।

Sep 18, 2026 - 11:42
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₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ, सरकार रखेगी नजर

15 अक्टूबर से UPI के नियमों में बड़ा बदलाव

भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI में 15 अक्टूबर 2026 से नया Merchant Discount Rate यानी MDR फ्रेमवर्क लागू होने जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन, जिनकी रकम ₹2,000 से ज्यादा है, उन पर MDR लगाया जाएगा। सामान्य दर 0.4% रखी गई है और बड़े ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्राहकों से वसूला जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक UPI के जरिए भुगतान करते समय अतिरिक्त शुल्क नहीं देंगे। MDR पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर मर्चेंट से संबंधित शुल्क है।

क्या ग्राहक की जेब पर पड़ेगा असर?

सरकार की कोशिश है कि MDR का बोझ व्यापारी ग्राहकों पर न डालें।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत की जा चुकी है और सरकार MDR के लागू होने के बाद गलत प्रैक्टिस पर नजर रखेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुकानदार ग्राहक से अलग से UPI चार्ज न वसूलें।

यानी अगर कोई ग्राहक ₹5,000 का सामान खरीदकर UPI से भुगतान करता है, तो सामान्य स्थिति में उसे ₹5,000 ही चुकाने होंगे। MDR का भुगतान ग्राहक के बजाय संबंधित मर्चेंट/पेमेंट इकोसिस्टम के नियमों के अनुसार होगा।

₹2,000 से कम UPI पेमेंट पर क्या होगा?

नई व्यवस्था का असर हर UPI भुगतान पर नहीं पड़ेगा।

₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन भी मुफ्त बने रहेंगे, चाहे रकम कितनी भी हो।

सरकार के अनुसार, करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

छोटे दुकानदारों को भी राहत

छोटे व्यापारियों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है।

जो छोटे मर्चेंट अपने UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करते हैं, उन्हें zero-MDR framework के तहत राहत मिलेगी। ऐसे मर्चेंट के लिए ₹2,000 से ऊपर का कोई व्यक्तिगत ट्रांजैक्शन होने पर भी MDR नहीं लगेगा, यदि वे निर्धारित छोटे-मर्चेंट मानदंड के अंतर्गत आते हैं।

इसका मतलब है कि छोटे दुकानदारों और माइक्रो-बिजनेस पर नई व्यवस्था का प्रभाव सीमित रखने की कोशिश की गई है।

₹75,000 से ऊपर के पेमेंट पर अधिकतम ₹300 MDR

सामान्य 0.4% MDR के साथ एक कैप भी तय किया गया है।

₹75,000 या उससे ज्यादा के योग्य P2M ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 होगा। उदाहरण के तौर पर ₹50,000 के भुगतान पर 0.4% के हिसाब से MDR ₹200 होगा, जबकि ₹1 लाख के भुगतान पर गणना के हिसाब से ₹400 बनता है, लेकिन लागू कैप के कारण MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था

कुछ सेक्टरों के लिए सामान्य 0.4% MDR के बजाय अलग शुल्क संरचना रखी गई है।

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी कुछ श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा।

सरकारी यूटिलिटी बिल और शिक्षा से जुड़े कुछ भुगतान भी विशेष शुल्क व्यवस्था के अंतर्गत आएंगे। वहीं कुछ वित्तीय लेनदेन के लिए इससे भी कम MDR तय किया गया है।

कौन से UPI पेमेंट मुफ्त रहेंगे?

नई व्यवस्था के बावजूद कई तरह के UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा:

  • Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन
  • ₹2,000 तक के P2M भुगतान
  • पात्र छोटे व्यापारियों के भुगतान
  • कुछ UPI AutoPay/recurring payments
  • नियमों के तहत आने वाले कुछ जरूरी सेक्टर के भुगतान

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अक्टूबर से हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा।

MDR आखिर क्यों लाया गया?

UPI के जरिए भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन लंबे समय तक zero-MDR मॉडल में बैंक, पेमेंट ऐप और दूसरे इकोसिस्टम पार्टिसिपेंट्स को ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने की लागत का सीधा कमर्शियल रेवेन्यू नहीं मिलता था।

नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के लिए एक सस्टेनेबल रेवेन्यू मॉडल तैयार करना और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और तकनीकी क्षमता में निवेश को सपोर्ट करना है।

सरकार की नजर क्यों रहेगी?

सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं व्यापारी MDR को ग्राहक से अलग से वसूलना शुरू न कर दें।

इसी वजह से सरकार ने कहा है कि वह पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ मिलकर implementation और enforcement की निगरानी करेगी। सरकार का उद्देश्य है कि UPI ग्राहकों के लिए भुगतान का अनुभव पहले की तरह सहज और बिना अतिरिक्त शुल्क के बना रहे।

Bottom Line

15 अक्टूबर से UPI में MDR व्यवस्था जरूर बदल रही है, लेकिन ग्राहकों के लिए सामान्य UPI इस्तेमाल पर कोई सीधा चार्ज लागू नहीं किया गया है।

मुख्य बदलाव चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant भुगतान पर है। छोटे व्यापारी, ₹2,000 तक के भुगतान और P2P ट्रांजैक्शन के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। वहीं सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि मर्चेंट MDR का खर्च ग्राहकों पर अलग से न डालें।

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