दिव्या मित्तल ही नहीं, इन IAS अधिकारियों ने भी छोड़ी सरकारी सेवा और चुनी राजनीति, जानिए अब क्या कर रहे हैं
पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान के बाद उन अफसरों की चर्चा फिर तेज हो गई है, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना। इस सूची में शाह फैसल, अश्विनी वैष्णव, अर्जुन राम मेघवाल और अजीत जोगी जैसे नाम शामिल हैं।
IAS अधिकारी बनना देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक माना जाता है। ऐसे में कोई अधिकारी अपनी प्रशासनिक सेवा छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखता है, तो यह अपने आप में एक बड़ा करियर बदलाव होता है। दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान के बाद एक बार फिर ऐसे पूर्व अधिकारियों की चर्चा शुरू हो गई है, जिन्होंने सिविल सेवा से राजनीति तक का सफर तय किया।
दिव्या मित्तल 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की है और विदेश में भी काम किया है। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर राजनीति में आने की जानकारी दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने अभी किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
शाह फैसल
इस सूची में शाह फैसल का नाम भी शामिल है। उन्होंने 2010 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की थी। लंबे समय तक IAS अधिकारी के रूप में काम करने के बाद उन्होंने 2019 में इस्तीफा दिया और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से राजनीतिक दल बनाया।
हालांकि, उनका राजनीतिक सफर लंबे समय तक नहीं चला। 2020 में उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली। बाद में उनका इस्तीफा वापस लेने का आवेदन किया गया और 2022 में सरकार ने उनकी IAS सेवा बहाल कर दी।
अश्विनी वैष्णव
अश्विनी वैष्णव भी प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आए चर्चित नामों में शामिल हैं। वह 1994 बैच के IAS अधिकारी रहे और ओडिशा कैडर में काम किया। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान वह बालासोर और कटक के कलेक्टर रहे।
बाद में उन्होंने केंद्र में भी काम किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के डिप्टी सेक्रेटरी और फिर प्राइवेट सेक्रेटरी रहे। 2008 में सरकारी सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने Wharton School से MBA किया और निजी क्षेत्र में काम किया। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ और 2019 में वह राज्यसभा पहुंचे। 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया।
अजीत जोगी
प्रशासन से राजनीति में जाने वाले प्रमुख नामों में अजीत जोगी भी रहे हैं। वह 1968 बैच के अधिकारी थे और राजनीति में आने से पहले जिला कलेक्टर के पद पर काम कर चुके थे।
बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और आगे चलकर छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। इस तरह उनका करियर प्रशासनिक सेवा से शुरू होकर राज्य की शीर्ष राजनीतिक जिम्मेदारी तक पहुंचा।
अर्जुन राम मेघवाल और दूसरे अधिकारी
सिविल सेवा से राजनीति में आने वाले नामों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। Aaj Tak की रिपोर्ट में अर्जुन राम मेघवाल, यशवंत सिन्हा और आर.के. सिंह जैसे पूर्व अधिकारियों का भी उल्लेख है, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीतिक करियर बनाया।
इन उदाहरणों से यह जरूर पता चलता है कि कुछ पूर्व सिविल सेवकों ने प्रशासनिक अनुभव के बाद सार्वजनिक जीवन और राजनीति को अपने करियर का अगला पड़ाव बनाया। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति का राजनीतिक सफर और उसकी परिस्थितियां अलग रही हैं।
दिव्या मित्तल का मामला फिलहाल शुरुआती चरण में है। उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की है, लेकिन किस पार्टी में शामिल होंगी या चुनावी राजनीति में उनकी आगे की भूमिका क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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