नेपाल में महातबाही: पहाड़ों से आई मौत की लहर, जानें भोटेकोशी बाढ़ की पूरी Timeline
नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत की ओर नदी का रास्ता रुकने से बनी झील टूटने के बाद पानी भोटेकोशी से त्रिशूली और नारायणी तक तेजी से पहुंचा।
नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई विनाशकारी बाढ़ ने कुछ ही घंटों में कई इलाकों की तस्वीर बदल दी। भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र में अचानक पानी बढ़ने से रिहायशी इलाकों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा। शुरुआती रिपोर्टों में इस आपदा के कारण को लेकर भूकंप, हिमस्खलन और ग्लेशियल झील फटने जैसी आशंकाएं सामने आई थीं। बाद में नेपाल के जल विज्ञान विभाग की प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट ने बताया कि तिब्बत की ओर नदी के अवरुद्ध होने से बनी एक झील के टूटने के बाद पानी का बड़ा सैलाब नीचे की ओर आया।
सुबह 8:37 बजे—भूकंप का झटका
तकनीकी टाइमलाइन के अनुसार, सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंपीय झटका दर्ज किया गया। इसके कुछ ही समय बाद भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हुई। हालांकि, वैज्ञानिक स्तर पर यह जांच भी हुई कि भूकंपीय गतिविधि का हिमस्खलन या नदी अवरोध से क्या संबंध था।
8:50 बजे—हाइड्रोलॉजिकल स्टेशन से संपर्क टूटा
बाढ़ की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह करीब 8:50 बजे स्याफ्रूबेसी के जलमापन केंद्र से डेटा मिलना बंद हो गया। इसके बाद पानी का तेज बहाव भोटेकोशी से नीचे की ओर बढ़ता गया।
भोटेकोशी से त्रिशूली और नारायणी तक पहुंचा सैलाब
तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत में नदी के अवरुद्ध होने से बनी झील टूटने के बाद भारी मात्रा में पानी भोटेकोशी में आया। इसके बाद इसका असर त्रिशूली और फिर नारायणी नदी के निचले इलाकों तक पहुंचा। बाढ़ की ताकत इतनी ज्यादा थी कि नदी तंत्र के चार स्वचालित जलमापन केंद्र भी बह गए।
11:26 बजे—जलस्तर चेतावनी सीमा से ऊपर
बाढ़ का पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा। सुबह 11:26 बजे मलेखु के फुर्केखोला जलमापन केंद्र पर जलस्तर चेतावनी सीमा पार कर गया। इसके करीब 17 मिनट बाद, 11:43 बजे जलस्तर खतरे की सीमा से ऊपर पहुंच गया। इससे आसपास के इलाकों के लिए खतरा और बढ़ गया।
करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी
तकनीकी आकलन के अनुसार, बाढ़ की पूरी अवधि के दौरान केवल देवघाट जलमापन केंद्र से करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी गुजरने का अनुमान है। इतनी बड़ी मात्रा में पानी और उसके साथ आया मलबा तबाही का बड़ा कारण बना।
भारी तबाही और बड़े पैमाने पर राहत-बचाव
बाढ़ ने नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। शुरुआती रिपोर्टों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई। विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के भी लापता होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी। राहत और बचाव अभियान के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और संचार व्यवस्था ने मुश्किलें और बढ़ाईं।
नेपाल की बाढ़ पूर्वानुमान शाखा ने भोटेकोशी-त्रिशूली-नारायणी नदी तंत्र पर लगातार निगरानी रखने और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
यानी कुछ ही घंटों में एक नदी का अचानक बदला रूप हजारों लोगों के लिए जिंदगी और मौत की जंग बन गया।
नोट: बाढ़ के सटीक ट्रिगर को लेकर शुरुआती घंटों में अलग-अलग वैज्ञानिक आकलन सामने आए थे। इसलिए “ग्लेशियल झील फटना” या “हिमस्खलन से नदी अवरुद्ध होना” जैसे कारणों को प्रारंभिक/तकनीकी आकलन के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है।
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