दो युद्धों के बीच भारत में जुटे दुनिया के बड़े नेता, दिल्ली में BRICS Summit को लेकर क्या होगा खास?

भारत नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई बड़े नेता इसमें शामिल हो रहे हैं। यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों के बीच होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और BRICS देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

Sep 11, 2026 - 11:08
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दो युद्धों के बीच भारत में जुटे दुनिया के बड़े नेता, दिल्ली में BRICS Summit को लेकर क्या होगा खास?

नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit को लेकर तैयारियां तेज हैं। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत राजधानी के भारत मंडपम में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी युद्धों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है। ऐसे में BRICS के मंच पर होने वाली चर्चाओं पर पूरी दुनिया की नजर है।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

BRICS Summit को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।

करीब 15,000 दिल्ली पुलिसकर्मी, पैरामिलिट्री फोर्स की 200 कंपनियां और दिल्ली में 500 से ज्यादा CCTV कैमरे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।

विदेशी मेहमानों के काफिलों की आवाजाही के दौरान कई इलाकों में अस्थायी ट्रैफिक रोक और डायवर्जन लगाए जा सकते हैं। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली पूरी तरह बंद नहीं होगी।

मथुरा रोड, सरदार पटेल मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोका रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड और नीति मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।

पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेश्कियन पर नजर

BRICS Summit में कई बड़े नेताओं की मौजूदगी इसे खास बना रही है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बातचीत भी अहम मानी जा रही है।

सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर है।

2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में काफी तनाव आया था। हालांकि हाल के समय में दोनों देशों के बीच रिश्तों में कुछ सुधार देखने को मिला है और उड़ानों, वीजा तथा उच्चस्तरीय संपर्कों को धीरे-धीरे बहाल किया गया है।

BRICS में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

BRICS का विस्तार होने के बाद इसमें अब ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है:

  • BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग
  • व्यापार और निवेश बढ़ाना
  • वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा
  • अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर विचार-विमर्श
  • विकास और वित्तीय सहयोग
  • BRICS देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी
  • वैश्विक संस्थानों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका

कौन-कौन से नेता शामिल होंगे?

पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेश्कियन के अलावा कई अन्य देशों के नेता भी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।

इनमें दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल शामिल हैं।

ब्राजील की ओर से विदेश मंत्री माउरो विएरा के प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद है। वहीं UAE की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के आने की संभावना है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई गई है।

भारत के लिए क्यों अहम है BRICS Summit?

BRICS की शुरुआत 2009 में प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक मंच के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक संस्थानों में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत करना था।

आज BRICS का विस्तार हो चुका है और इसमें अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक हित रखने वाले देश शामिल हैं।

यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्ध, अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत में हो रहा यह BRICS Summit बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत इस सम्मेलन के जरिए आर्थिक सहयोग, वैश्विक दक्षिण की आवाज और बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दे सकता है।

ऐसे में सवाल सिर्फ BRICS देशों की बैठक का नहीं है, बल्कि यह सम्मेलन बदलती हुई वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को भी दिखाने वाला महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।

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