कावेरी इंजन का रूस में सफल ट्रायल, 48.5 kN थ्रस्ट से भारत की स्वदेशी ताकत को मिली बड़ी कामयाबी

भारत के स्वदेशी कावेरी ड्राई इंजन ने रूस में हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इंजन ने 48.5 किलोन्यूटन थ्रस्ट हासिल किया, जबकि इसका लक्ष्य 46 kN था। अब इंजन अंतिम एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेशन के चरण में है।

Sep 29, 2026 - 16:38
 0  1
कावेरी इंजन का रूस में सफल ट्रायल, 48.5 kN थ्रस्ट से भारत की स्वदेशी ताकत को मिली बड़ी कामयाबी

भारत के स्वदेशी रक्षा इंजन कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। कावेरी ड्राई इंजन ने रूस में कठिन परिस्थितियों में किए गए हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। परीक्षण के दौरान इंजन ने 48.5 किलोन्यूटन का थ्रस्ट हासिल किया, जो इसके निर्धारित 46 किलोन्यूटन लक्ष्य से अधिक है।

कावेरी इंजन को गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) ने विकसित किया है। रूस में किए गए परीक्षणों का उद्देश्य इंजन के प्रदर्शन और स्थिरता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परखना था। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल में इंजन ने ऊंचाई वाले वातावरण में प्रदर्शन किया, जबकि फ्लाइट ट्रायल में भी इसका प्रदर्शन स्थिर रहा।

इस इंजन की खास बात इसका ड्राई वर्जन होना है। इसमें आफ्टरबर्नर नहीं लगाया गया है। इसका डिजाइन ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए उपयोगी माना जाता है, जहां लंबे समय तक स्थिर और अपेक्षाकृत किफायती थ्रस्ट की जरूरत होती है।

कावेरी ड्राई इंजन को भारत के DRDO Ghatak UCAV कार्यक्रम से भी जोड़ा जा रहा है। Ghatak एक स्वदेशी स्टील्थ मानव रहित कॉम्बैट एयर व्हीकल कार्यक्रम है। ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए भरोसेमंद स्वदेशी इंजन महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे विदेशी पावरप्लांट पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

अब इस इंजन के सामने अगला महत्वपूर्ण चरण CEMILAC certification है। CEMILAC यानी Centre for Military Airworthiness and Certification से अंतिम एयरवर्थिनेस मंजूरी मिलने के बाद इसके उत्पादन की जिम्मेदारी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) संभाल सकता है।

कावेरी कार्यक्रम लंबे समय से विकास और तकनीकी चुनौतियों के दौर से गुजरता रहा है। ऐसे में ड्राई इंजन का सफल परीक्षण भारत के स्वदेशी एयरो-इंजन विकास प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे चलकर इसी तकनीकी आधार पर Kaveri 2.0 जैसे विकसित संस्करणों पर भी काम किया जा रहा है। Aaj Tak की रिपोर्ट में नए कोर डिजाइन वाले संस्करण के लिए 55–60 kN के संभावित थ्रस्ट का उल्लेख किया गया है।

रूस में सफल परीक्षण के बाद अब फोकस घरेलू प्रमाणन और उत्पादन पर है। यदि आवश्यक प्रमाणन और एकीकरण के चरण सफलतापूर्वक पूरे होते हैं, तो कावेरी ड्राई इंजन भारत के भविष्य के स्वदेशी UAV और UCAV प्लेटफॉर्म के लिए एक महत्वपूर्ण पावरप्लांट बन सकता है।

नोट: “अमेरिका को झटका” रिपोर्ट की हेडलाइन में इस्तेमाल किया गया framing है; उपलब्ध रिपोर्ट में अमेरिका की किसी प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया या नुकसान का स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया गया है। इसलिए इसे तथ्य के रूप में नहीं बल्कि headline framing के रूप में देखना चाहिए।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0