भारत में करोड़ों ईयरबड्स की खरीद, क्या साथ आ रहा है सुनने की बीमारी का खतरा?
भारत में ईयरबड्स और हेडफोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन लंबे समय तक तेज आवाज में सुनने की आदत को लेकर ENT विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। लगातार इस्तेमाल से कान में घंटी बजना यानी टिनिटस, सुनने में कमी और कानों में असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं, खासकर युवाओं में।
मेट्रो हो, कैब हो, जिम हो या फिर घर में OTT और गेमिंग—आज ईयरबड्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। कई लोग घंटों तक कानों में वायरलेस ईयरबड्स लगाए रहते हैं।
लेकिन ईयरबड्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है—क्या हमारी यह आदत आने वाले समय में सुनने की समस्या को बढ़ा सकती है?
ENT विशेषज्ञ डॉ. पी. हरिहरा मूर्ति के मुताबिक, अब कम उम्र के लोगों में भी कानों से जुड़ी शिकायतें देखने को मिल रही हैं।
युवाओं में बढ़ रही हैं कानों की शिकायतें
टिनिटस, सुनने में कमी और कानों में लगातार असहजता जैसी समस्याएं पहले ज्यादा उम्र के लोगों से जोड़कर देखी जाती थीं।
लेकिन अब युवा और खासकर किशोरों में भी ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
टिनिटस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को आसपास कोई आवाज न होने के बावजूद कान में घंटी, भनभनाहट या दूसरी आवाज सुनाई देती है।
डॉक्टर के मुताबिक, लगातार ईयरबड्स या हेडफोन का इस्तेमाल, लंबे समय तक स्क्रीन देखने और देर रात तक जागने की आदतें शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
समस्या सिर्फ एक तेज गाने से नहीं
कान को नुकसान हमेशा किसी एक तेज आवाज या लंबे फोन कॉल की वजह से ही नहीं होता। असली चिंता लंबे समय तक बार-बार तेज आवाज के संपर्क में रहने से है।
लगातार तेज आवाज सुनने से शुरुआत में कानों में थकान या अस्थायी रूप से सुनने की क्षमता में बदलाव महसूस हो सकता है।
अगर यह आदत लंबे समय तक जारी रहती है, तो सुनने की समस्या गंभीर और स्थायी भी हो सकती है।
इसीलिए विशेषज्ञ लगातार कई घंटों तक ईयरबड्स इस्तेमाल करने के बजाय बीच-बीच में कानों को आराम देने की सलाह देते हैं।
कान साफ करने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल न करें
ईयरबड्स को लेकर एक और आम गलती है—इनका इस्तेमाल कान साफ करने के लिए करना।
कान में कोई चीज डालने से वैक्स बाहर निकलने के बजाय और अंदर धकेला जा सकता है। इससे कान में ब्लॉकेज, जलन या चोट हो सकती है और कुछ मामलों में कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इसलिए कान की सफाई के लिए ईयरबड्स या किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
कई लोग कानों से जुड़ी शुरुआती समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं और तब डॉक्टर के पास जाते हैं जब परेशानी काफी बढ़ जाती है।
अगर आपको ऐसी जगह पर भी लोगों की बात समझने में परेशानी होने लगे जहां आमतौर पर आसानी से सुनाई देता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा लगातार कान में आवाज आना, सुनने की क्षमता कम होना, कान में दर्द या बातचीत समझने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो ENT विशेषज्ञ से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर सुनने की जांच करवाना बेहतर है।
ईयरबड्स इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
विशेषज्ञ कुछ आसान सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं:
- आवाज को जितना संभव हो कम स्तर पर रखें।
- लगातार कई घंटों तक ईयरबड्स इस्तेमाल न करें।
- बीच-बीच में कानों को आराम दें।
- अगर आप नियमित रूप से ईयरबड्स इस्तेमाल करते हैं तो समय-समय पर हियरिंग चेकअप पर विचार करें।
- कान साफ करने के लिए ईयरबड्स या दूसरी चीजें कान के अंदर न डालें।
- लगातार टिनिटस या सुनने में कमी महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
ईयरबड्स खुद समस्या नहीं हैं। असली सवाल यह है कि उनका इस्तेमाल कितनी तेज आवाज में, कितनी बार और कितने लंबे समय तक किया जा रहा है।
भारत में ईयरबड्स का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। अब यह लोगों पर निर्भर करता है कि यह सुविधा भविष्य में सुनने की समस्या का कारण न बने।
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