'आवेदन किया, फिर भी नहीं मिला पैसा'... अन्नपूर्णा भंडार योजना पर महिलाओं का फूटा गुस्सा, सरकार से जवाब की मांग
पश्चिम बंगाल की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर महिलाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई लाभार्थियों का आरोप है कि आवेदन करने के बावजूद उन्हें अब तक योजना की आर्थिक सहायता नहीं मिली। इस मुद्दे पर कई जिलों में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन से जल्द भुगतान की मांग की।
पश्चिम बंगाल सरकार की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा भंडार योजना एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि योजना के तहत आवेदन करने वाली बड़ी संख्या में महिलाओं को अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिली है। इससे नाराज महिलाओं ने कई स्थानों पर प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए, आवेदन प्रक्रिया पूरी की और संबंधित अधिकारियों के निर्देशों का पालन भी किया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उनके बैंक खातों में योजना की राशि नहीं पहुंची।
महिलाओं का कहना है कि सरकार ने इस योजना को गरीब और जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू किया था। योजना की घोषणा के समय दावा किया गया था कि पात्र महिलाओं को नियमित वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे वे घरेलू खर्च और आवश्यक जरूरतों को पूरा कर सकेंगी। लेकिन अब बड़ी संख्या में लाभार्थियों का आरोप है कि उन्हें केवल आवेदन की रसीद मिली, जबकि वास्तविक लाभ अब तक नहीं मिला।
कई महिलाओं ने बताया कि वे कई बार स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों, पंचायत कार्यालयों और संबंधित विभागों के चक्कर लगा चुकी हैं। हर बार उन्हें केवल इंतजार करने या तकनीकी समस्या का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है। कुछ महिलाओं का कहना है कि अधिकारियों ने बैंक खाते की जानकारी दोबारा जमा करने को कहा, जबकि कुछ को आवेदन की स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई। इससे लाभार्थियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं।
राज्य के कई जिलों में महिलाओं ने समूह बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार से जल्द भुगतान करने और योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने की मांग की। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में यह आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि समय पर राशि नहीं मिलती है तो योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कई महिलाओं ने कहा कि सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। उनका आरोप है कि योजना की जानकारी तो व्यापक रूप से दी गई, लेकिन लाभ वितरण की प्रक्रिया धीमी और अव्यवस्थित है। कुछ लाभार्थियों ने यह भी दावा किया कि उनके आवेदन की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं की गई है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन मामलों में भुगतान नहीं हुआ है, उनकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी कारणों, दस्तावेजों की जांच और बैंक खातों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को भुगतान में देरी का संभावित कारण बताया जा रहा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पात्र लाभार्थियों को नियमों के अनुसार योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर योजना के सही क्रियान्वयन में विफल रहने का आरोप लगाया है और कहा है कि लाभार्थियों को समय पर सहायता नहीं मिलना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि सरकार गरीबों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और यदि कहीं कोई तकनीकी या प्रशासनिक समस्या है तो उसे जल्द दूर किया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि किसी भी सरकारी योजना की सफलता केवल घोषणा से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है। यदि पात्र लाभार्थियों तक समय पर सहायता नहीं पहुंचती, तो लोगों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि लंबित आवेदनों की जल्द समीक्षा कर पात्र महिलाओं के खातों में राशि भेजी जाए और शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।
फिलहाल पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर महिलाओं का असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इन शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी करते हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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