अमेरिका-ईरान में फिर टकराव, ईरान की धमकी से बढ़ा संकट; भारत पर कितना पड़ेगा असर?

अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की शांति के बाद फिर सैन्य टकराव बढ़ गया है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने पलटवार किया है और कड़े जवाब की चेतावनी दी है। तनाव बढ़ने से Strait of Hormuz, कच्चे तेल की कीमतों और भारत की अर्थव्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है।

Sep 2, 2026 - 10:31
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अमेरिका-ईरान में फिर टकराव, ईरान की धमकी से बढ़ा संकट; भारत पर कितना पड़ेगा असर?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार को अमेरिका ने ईरान में नए हवाई हमले किए, जिसके बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, हमले ईरान की ओर से Strait of Hormuz में कमर्शियल शिपिंग और क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कथित हमले के प्रयासों के जवाब में किए गए।

इससे पहले अमेरिका ने Larak Island के पास ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था। अमेरिका का दावा था कि ईरान Strait of Hormuz में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।

ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने जवाबी कार्रवाई जारी रखी तो अमेरिका और ज्यादा ताकत के साथ हमला कर सकता है। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने भी अमेरिकी हमलों का जवाब देने की बात कही है। इस तरह दोनों देशों के बीच बयानबाजी के साथ-साथ सैन्य तनाव भी लगातार बढ़ रहा है।

Strait of Hormuz क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

इस पूरे संकट में Strait of Hormuz सबसे बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन गया है। यह समुद्री मार्ग Persian Gulf को Gulf of Oman और Arabian Sea से जोड़ता है।

अमेरिकी EIA के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में इस रास्ते से औसतन 20.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल गुजरा, जो दुनिया की पेट्रोलियम लिक्विड्स खपत के करीब 20% के बराबर था। इस रास्ते से वैश्विक LNG व्यापार का भी 20% से ज्यादा हिस्सा गुजरता है।

ताजा तनाव के बीच इस रास्ते पर शिपिंग गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं। Reuters के अनुसार, 2 सितंबर को केवल चार कमोडिटी जहाज Hormuz से गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत करीब 13 जहाज प्रतिदिन था।

कच्चे तेल में फिर उबाल

अमेरिका-ईरान संघर्ष बढ़ने के साथ ही वैश्विक तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। Reuters के मुताबिक, मंगलवार को Brent crude $94.65 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 4.6% की बढ़त थी, जबकि WTI करीब 5.2% बढ़कर $90.22 पर पहुंच गया।

अगर Strait of Hormuz में लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एशिया समेत पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

भारत के लिए यह संकट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। Hormuz से गुजरने वाले तेल का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों को जाता है। EIA के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में Hormuz से गुजरने वाले crude oil और condensate का करीब 89% हिस्सा एशियाई बाजारों की ओर गया, जिसमें भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया प्रमुख गंतव्य थे।

तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर भारत के इंपोर्ट बिल और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही पेट्रोल-डीजल, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और उद्योगों की लागत पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

महंगा ईंधन ट्रकों और दूसरे परिवहन साधनों की लागत बढ़ा सकता है, जिसका असर आगे चलकर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। LPG और LNG की लागत पर भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का असर पड़ सकता है।

शेयर बाजार और रुपये पर भी नजर

अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ज्यादा महंगा तेल डॉलर की मांग और आयात बिल को बढ़ा सकता है, जिससे रुपये और भारतीय शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका-ईरान का यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या Strait of Hormuz में लंबे समय तक व्यवधान पैदा करता है। अगर संघर्ष और फैलता है, तो इसका असर तेल से लेकर महंगाई और भारतीय अर्थव्यवस्था तक दिखाई दे सकता है।

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