हमास की तरह हूतियों ने बनाई 20 KM लंबी खुली सुरंगें, बाब-अल-मंदेब का समुद्री रास्ता टारगेट
यमन के हूती विद्रोहियों ने कथित तौर पर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास करीब 20 किलोमीटर लंबी खाइयां और रक्षात्मक ठिकाने तैयार किए हैं। दुबाब और पेरिम द्वीप के आसपास ऊंचे इलाकों में बनाई गई इन किलेबंदियों से रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नजर रखना आसान हो सकता है। हालांकि, इसे भूमिगत सुरंगों का नेटवर्क कहना अभी सही नहीं होगा—रिपोर्ट में मुख्य रूप से खुली खाइयों और मिट्टी से बने रक्षात्मक ढांचों का जिक्र है।
बाब-अल-मंदेब के पास हूतियों की 20 KM लंबी किलेबंदी
यमन के लाल सागर तट से सामने आई एक नई तस्वीर ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने इस रणनीतिक इलाके के आसपास करीब 20 किलोमीटर लंबी खाइयां और रक्षात्मक किलेबंदी तैयार की है।
आज़तक की 18 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ये संरचनाएं दुबाब और पेरिम द्वीप के आसपास ऊंचे इलाकों में बनाई गई हैं, जहां से बाब-अल-मंदेब के आसपास के इलाके और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों में कुछ ही दिनों के भीतर इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधि दिखाई देने की बात कही गई है।
क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है।
यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और इसके जरिए यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच समुद्री व्यापार चलता है।
यह रास्ता आगे स्वेज नहर से जुड़ता है। इसलिए एशिया और यूरोप के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए इसका रणनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है।
तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही में भी यह मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कहां बनाई गई हैं ये खाइयां?
रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने दुबाब और पेरिम द्वीप के आसपास ऊंची जमीन पर खाइयां और रक्षात्मक ढांचे तैयार किए हैं।
इस इलाके की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। ऊंचे स्थानों से आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान होता है।
आज़तक की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में करीब 20 किलोमीटर तक फैली खाइयों और अर्थवर्क्स जैसी संरचनाएं दिखाई देती हैं।
इन खाइयों का मकसद क्या हो सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, इन किलेबंदियों के पीछे मुख्य रूप से दो उद्देश्य हो सकते हैं।
पहला, यह हूती लड़ाकों के लिए रक्षात्मक व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है। यमन में हूती बलों और उनके विरोधी गुटों के बीच लंबे समय से संघर्ष चला आ रहा है।
दूसरा, ऊंचे इलाकों में मौजूद ऐसे ठिकाने निगरानी और अवलोकन के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
ऊंचाई से किसी क्षेत्र में आने-जाने वाली सैन्य या अन्य गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाता है।
क्या ये हमास जैसी सुरंगें हैं?
इस निर्माण की तुलना हमास द्वारा गाजा में बनाए गए सुरंग नेटवर्क से की जा रही है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
रिपोर्ट में करीब 20 किलोमीटर लंबी खुली खाइयों और रक्षात्मक अर्थवर्क्स का उल्लेख है। इसे फिलहाल 20 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग प्रणाली कहना सही नहीं होगा।
ऐसी खुली खाइयां सैनिकों को कुछ हद तक सुरक्षा देने, आवाजाही को व्यवस्थित करने और रक्षात्मक मोर्चे तैयार करने में इस्तेमाल की जा सकती हैं।
समुद्री रास्ते पर क्यों बढ़ी चिंता?
बाब-अल-मंदेब के आसपास पहले भी हूती हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी प्रभावित हुई है।
पिछले वर्षों में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने लाल सागर और स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से यानी केप ऑफ गुड होप के रास्ते का इस्तेमाल किया।
लेकिन इस वैकल्पिक रास्ते से यात्रा काफी लंबी हो जाती है।
इसका सीधा असर:
- जहाजों के यात्रा समय पर
- ईंधन की लागत पर
- बीमा खर्च पर
- माल ढुलाई की कीमतों पर
- वैश्विक सप्लाई चेन पर
पड़ सकता है।
क्या तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा?
अगर बाब-अल-मंदेब में तनाव बढ़ता है और बड़े पैमाने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, सिर्फ खाइयों के निर्माण का मतलब यह नहीं है कि बाब-अल-मंदेब बंद हो गया है।
असल प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि क्षेत्र में सैन्य तनाव कितना बढ़ता है और अंतरराष्ट्रीय जहाज इस मार्ग का इस्तेमाल जारी रखते हैं या नहीं।
ऊंची जमीन से क्या फायदा?
सैन्य दृष्टि से ऊंचे इलाकों में बनाई गई रक्षात्मक स्थिति कई फायदे दे सकती है।
ऐसी जगहों से सैनिकों को आसपास के इलाके का बेहतर दृश्य मिल सकता है और उन्हें प्राकृतिक ऊंचाई से सुरक्षा भी मिल सकती है।
लेकिन केवल खाइयां किसी इलाके को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनातीं। उनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उनके साथ किस तरह की दूसरी रक्षा व्यवस्था, हथियार और निगरानी प्रणाली मौजूद है।
वैश्विक व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
बाब-अल-मंदेब केवल यमन या लाल सागर का स्थानीय समुद्री रास्ता नहीं है। यह वैश्विक व्यापार नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अगर यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो कंपनियों को लंबा समुद्री रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
इससे सामान की डिलीवरी में देरी और परिवहन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।
यही वजह है कि बाब-अल-मंदेब के आसपास किसी भी नई सैन्य गतिविधि पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
करीब 20 किलोमीटर लंबी बताई जा रही इन खाइयों और किलेबंदियों से साफ है कि हूती बल इस इलाके में अपनी रक्षात्मक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं—ऐसा रिपोर्ट में बताया गया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये ठिकाने केवल रक्षात्मक युद्ध की तैयारी हैं या भविष्य में बाब-अल-मंदेब के आसपास व्यापक सैन्य रणनीति का हिस्सा बनेंगे।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टिंग में निर्माण गतिविधि की जानकारी सामने आई है, लेकिन इन ठिकानों की वास्तविक सैन्य क्षमता और भविष्य में इनके इस्तेमाल का आकलन अलग विषय है।
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