राजस्थान निकाय चुनाव में नहीं उड़ेगी ओवैसी की ‘पतंग’, AIMIM को सिंबल देने से हाईकोर्ट का इनकार

राजस्थान शहरी निकाय चुनाव से पहले AIMIM को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को राजस्थान में ‘पतंग’ चुनाव चिह्न नहीं मिल पाएगा। अब AIMIM के उम्मीदवार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे।

Sep 1, 2026 - 10:33
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राजस्थान निकाय चुनाव में नहीं उड़ेगी ओवैसी की ‘पतंग’, AIMIM को सिंबल देने से हाईकोर्ट का इनकार

राजस्थान में होने वाले शहरी निकाय चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद पार्टी के लिए चुनाव में अपने पारंपरिक ‘पतंग’ चुनाव चिह्न के साथ उतरने का रास्ता बंद हो गया है।

राज्य में AIMIM लगातार अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है और पार्टी की नजर खास तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाने पर है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले सिंबल का मुद्दा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

दरअसल, राजस्थान के 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। AIMIM ने अपने उम्मीदवारों के लिए ‘पतंग’ चुनाव चिह्न की मांग की थी, लेकिन राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने इसे मंजूरी नहीं दी।

राज्य निर्वाचन आयोग का तर्क था कि AIMIM को तेलंगाना में राज्य स्तरीय राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन राजस्थान में पार्टी को उसी आधार पर ‘पतंग’ सिंबल आवंटित नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के खिलाफ AIMIM ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में AIMIM उम्मीदवार ‘पतंग’ सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

इसका सीधा असर पार्टी के चुनाव प्रचार और मतदाताओं के बीच उसकी पहचान पर पड़ सकता है। अब AIMIM के प्रत्याशियों को निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर चुनाव लड़ना होगा, जिससे पार्टी के सामने चुनावी रणनीति की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

राजस्थान में AIMIM पहली बार बड़े स्तर पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की है।

इसी कड़ी में AIMIM ने हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के साथ मिलकर शहरी निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी की है। दोनों दलों के बीच गठजोड़ को राजस्थान के कुछ इलाकों में नए राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, ‘पतंग’ सिंबल नहीं मिलने से AIMIM के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने उम्मीदवारों की पहचान और चुनावी प्रचार को प्रभावी तरीके से मतदाताओं तक पहुंचाने की होगी।

ऐसे में राजस्थान के आगामी निकाय चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना अपने पारंपरिक चुनाव चिह्न के AIMIM कितना प्रभाव छोड़ पाती है और ओवैसी की पार्टी राज्य की राजनीति में अपनी जगह बनाने में कितनी सफल होती है।

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