क्या नए सिरे से तय होगी चीन के साथ LAC? डोभाल-वांग यी की बैठक में ‘Early Harvest’ पर बनी सहमति, समझें पूरा मामला
भारत और चीन के बीच LAC पर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में नई पहल सामने आई है। बीजिंग में NSA अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वें दौर की वार्ता के बाद दोनों देशों ने सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन पर आठ सूत्रीय सहमति जताई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि LAC की नई सीमा रेखा तय हो गई है।
भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीजिंग में 25 अगस्त 2026 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सीमा विवाद को लेकर अहम बातचीत हुई। यह भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक थी।
बैठक के अगले दिन दोनों देशों ने आठ सूत्रीय परिणाम और सहमति जारी की। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा “Early and Substantial Harvest” की हो रही है। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत और चीन ने पूरी LAC को नए सिरे से तय करने पर अंतिम समझौता कर लिया है। बल्कि दोनों देश सीमा के कुछ हिस्सों में पहले ठोस प्रगति हासिल करने और सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ाएंगे।
क्या LAC की नई सीमा रेखा तय हो रही है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत और चीन अब LAC को नए सिरे से तय करने जा रहे हैं?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच अभी सीमा विवाद के अंतिम समाधान पर कोई समझौता नहीं हुआ है। आठ सूत्रीय सहमति में सीमा निर्धारण यानी boundary delimitation पर बातचीत को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। इसके लिए WMCC यानी Working Mechanism for Consultation and Coordination के तहत एक Expert Group on Boundary Delimitation और एक Working Group on Border Management काम करेगा।
इन दोनों समूहों का पहला काम उनके Terms of Reference यानी कामकाज का दायरा तय करना होगा।
‘Early and Substantial Harvest’ का क्या मतलब है?
यह इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
“Early and Substantial Harvest” का मतलब broadly यह है कि पूरी सीमा समस्या के अंतिम समाधान का इंतजार करने के बजाय, जहां शुरुआती और ठोस प्रगति संभव हो, वहां पहले परिणाम हासिल करने की कोशिश की जाए।
भारत और चीन ने 2005 में तय किए गए राजनीतिक मानकों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर सीमा विवाद के समाधान के लिए एक निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
इसलिए इसे पूरी LAC के तत्काल पुनर्निर्धारण के तौर पर देखना सही नहीं होगा। यह एक चरणबद्ध बातचीत की दिशा में कदम है।
LAC और अंतरराष्ट्रीय सीमा में क्या फर्क है?
LAC भारत और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह निर्धारित और दोनों पक्षों द्वारा समान रूप से स्वीकार की गई सीमा रेखा नहीं है।
इसी वजह से कई इलाकों में दोनों देशों की LAC को लेकर अलग-अलग धारणाएं रही हैं। यही अंतर लंबे समय से सीमा पर तनाव और आमने-सामने की स्थिति का कारण रहा है।
वहीं, boundary delimitation का मतलब बातचीत और सहमति के जरिए सीमा की रेखा और उसके हिस्सों को निर्धारित करना है। इसके बाद जमीन पर सीमा का demarcation यानी वास्तविक निशान तय करने की प्रक्रिया आती है।
सीमा पर गलतफहमी रोकने की कोशिश
नई सहमति में सिर्फ सीमा निर्धारण ही नहीं, बल्कि मौजूदा स्थिति को संभालने पर भी जोर दिया गया है।
भारत और चीन ने तय किया है कि LAC पर किसी भी स्थिति को मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों के जरिए जल्द से जल्द संबोधित किया जाएगा, ताकि गलतफहमी या गलत आकलन से तनाव न बढ़े।
दो नए सैन्य हॉटलाइन चैनल
सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने दो अतिरिक्त बॉर्डर मिलिट्री हॉटलाइन चैनल स्थापित करने पर सहमति जताई है।
ये नए चैनल Eastern और Middle Sectors में होंगे। इसके अलावा वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठकों के लिए दो अतिरिक्त meeting points भी तय किए गए हैं।
इसका उद्देश्य किसी तनावपूर्ण स्थिति में दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे संपर्क को बेहतर बनाना और गलतफहमी को बढ़ने से रोकना है।
2027 में भारत में होगी अगली बड़ी बैठक
दोनों देशों ने Special Representatives की अगली यानी 26वीं बैठक 2027 में भारत में आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। इससे संकेत मिलता है कि सीमा विवाद पर बातचीत को आगे जारी रखने का रास्ता खुला हुआ है।
सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा पर भी जोर
आठ सूत्रीय सहमति में सीमा क्षेत्रों में व्यापार, तीर्थयात्रा और दूसरे संपर्क बढ़ाने की बात भी शामिल है।
दोनों देशों ने तीन निर्धारित सीमा व्यापार बिंदुओं के दोबारा खुलने की प्रगति का उल्लेख किया। साथ ही कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र की तीर्थयात्रा से जुड़े आदान-प्रदान को बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।
क्या 2020 के बाद रिश्तों में नया मोड़ है?
भारत-चीन संबंधों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद लंबे समय तक तनाव रहा। इसके बाद सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत हुई।
अब सीमा पर स्थिति को स्थिर रखने, सैन्य संचार बढ़ाने और सीमा निर्धारण पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशों को दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। Reuters के मुताबिक, दोनों देशों ने सीमा विवाद के लिए निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान की दिशा में बातचीत जारी रखने पर जोर दिया है।
आगे क्या उम्मीदें हैं?
आने वाले समय में सबसे अहम सवाल यह होगा कि Expert Group और Working Group वास्तव में कितना आगे बढ़ते हैं।
अगर दोनों पक्ष कुछ क्षेत्रों में सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन को लेकर ठोस सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो यह लंबे समय से चले आ रहे विवाद को चरणबद्ध तरीके से सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
लेकिन पूरी LAC का अंतिम निर्धारण एक जटिल और लंबी प्रक्रिया होगी। इसलिए फिलहाल इस घटनाक्रम को “सीमा तय हो गई” के बजाय “सीमा निर्धारण की बातचीत को नए चरण में ले जाने की कोशिश” के रूप में समझना ज्यादा सटीक है।
यानी बीजिंग से संदेश साफ है—LAC पर अभी नई सीमा रेखा नहीं खिंची है, लेकिन उसे तय करने की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाने पर भारत और चीन ने एक नया रास्ता जरूर खोला है।
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