N. चंद्रशेखरन 2027 में छोड़ेंगे Tata Sons Chairman का पद, 6 महीने की खींचतान के बाद लिया बड़ा फैसला
Tata Sons के चेयरमैन N. चंद्रशेखरन ने ऐलान किया है कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। यह फैसला Tata Sons और Tata Trusts के बीच कथित मतभेदों और छह महीने से जारी नेतृत्व को लेकर गतिरोध के बीच आया है।
Tata Group में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी शुरू हो गई है। Tata Sons के चेयरमैन N. चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए दावेदारी नहीं करने का फैसला किया है। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा।
चंद्रशेखरन ने Tata Sons Board को भेजे अपने हस्ताक्षरित बयान में इस फैसले की पुष्टि की। इसके साथ ही पिछले कई महीनों से उनके भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है।
अपने बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने Tata Group के साथ 40 साल पूरे किए हैं और करीब एक दशक तक Tata Sons का नेतृत्व करना उनके लिए बड़े सम्मान और जिम्मेदारी की बात रही है।
उन्होंने बताया कि Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने की सिफारिश की थी। Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee और Board ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।
हालांकि, प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। इसके बाद चंद्रशेखरन ने उस समय इस फैसले को टाल दिया था।
लेकिन अब छह महीने बाद भी इस मुद्दे पर कोई समाधान नहीं निकल पाया। चंद्रशेखरन के मुताबिक, Tata Sons के सामने कई महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट हैं और ऐसे समय में नेतृत्व को लेकर स्पष्टता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व कौन संभालेगा, इस पर जल्द निर्णय होना चाहिए ताकि कर्मचारियों, निवेशकों और बिजनेस पार्टनर्स का भरोसा बना रहे और नेतृत्व परिवर्तन सुचारू तरीके से हो सके।
इसी वजह से चंद्रशेखरन ने Tata Sons Board को जानकारी दी कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे।
Tata Trusts के साथ कथित खींचतान
चंद्रशेखरन का यह फैसला Tata Sons और Tata Trusts के बीच कथित मतभेदों की खबरों के बीच आया है। Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है और वह कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक है।
पिछले कुछ समय से ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं कि Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata को चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार को लेकर आपत्तियां थीं।
18 अगस्त को होने वाली Tata Sons AGM से पहले चंद्रशेखरन के दोबारा Tata Sons Director बनने को लेकर भी चर्चा थी। Tata Sons के चेयरमैन पद पर बने रहने के लिए बोर्ड में डायरेक्टर होना जरूरी है।
नेतृत्व को लेकर जारी अनिश्चितता का असर Tata Group की कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
चंद्रशेखरन का Tata Group में सफर
N. चंद्रशेखरन ने 1987 में Tata Group ज्वाइन किया था। इसके बाद उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बनाई और 2009 में Tata Consultancy Services (TCS) के CEO बने।
जनवरी 2017 में उन्हें Tata Sons का Executive Chairman बनाया गया। उन्होंने Cyrus Mistry की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी। Cyrus Mistry को 2016 में पद से हटाए जाने के बाद Tata Trusts और तत्कालीन चेयरमैन Ratan Tata के बीच सार्वजनिक विवाद सामने आया था।
फरवरी 2022 में चंद्रशेखरन को Tata Sons के चेयरमैन के तौर पर दूसरा कार्यकाल दिया गया था।
अपने कार्यकाल के दौरान Tata Group ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन, कंज्यूमर बिजनेस समेत कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत की।
Tata Stocks में गिरावट
चंद्रशेखरन के फैसले की खबर सामने आते ही Tata Group की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
TCS के शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान 5.58% तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Titan के शेयर भी करीब 2% तक नीचे आए। Tata Power, Tata Steel और Tata Consumer Products जैसे अन्य प्रमुख Tata Group स्टॉक्स में भी 1% से 2% तक की गिरावट देखी गई।
निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से Tata Sons के अगले चेयरमैन और भविष्य की नेतृत्व रणनीति को लेकर है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि N. चंद्रशेखरन के बाद Tata Sons की कमान किसके हाथ में जाएगी?
आने वाले महीनों में Tata Sons Board और Tata Trusts की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उन्हें न केवल नए चेयरमैन का चयन करना होगा, बल्कि देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक में नेतृत्व परिवर्तन को भी सुचारू तरीके से पूरा करना होगा।
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