अल्फांसो से केसर तक बड़ा झटका: जापान ने 20 साल बाद रोकी भारतीय आमों की एंट्री, जानें आखिर क्यों लगा बैन

जापान ने भारत से आने वाले अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे मशहूर आमों के आयात पर रोक लगा दी है। करीब 20 साल बाद लगाए गए इस प्रतिबंध के पीछे क्वारंटाइन जांच में मिली खामियां और कीट नियंत्रण नियमों का उल्लंघन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

May 29, 2026 - 10:49
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अल्फांसो से केसर तक बड़ा झटका: जापान ने 20 साल बाद रोकी भारतीय आमों की एंट्री, जानें आखिर क्यों लगा बैन

भारत के मशहूर आमों को इस बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा झटका लगा है। जापान ने 20 साल बाद भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है, जिससे देश के आम निर्यातकों और किसानों में चिंता बढ़ गई है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम किस्मों पर पड़ा है, जो जापान में काफी पसंद की जाती थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार जापान ने यह फैसला तब लिया जब मार्च 2026 में भारतीय ट्रीटमेंट और क्वारंटाइन सुविधाओं की जांच के दौरान कई तकनीकी कमियां सामने आईं। जापानी अधिकारियों ने पाया कि भारत में आमों को निर्यात से पहले कीटमुक्त करने की प्रक्रिया तय मानकों के मुताबिक नहीं हो रही थी। खासतौर पर fumigation और disinfection यानी कीट नियंत्रण प्रक्रिया में खामियां पाई गईं।

आखिर जापान ने भारतीय आमों पर बैन क्यों लगाया?

दरअसल जापान दुनिया के सबसे सख्त कृषि आयात नियमों वाले देशों में माना जाता है। वहां किसी भी फल या कृषि उत्पाद को आयात करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसमें कोई कीट, फल मक्खी (fruit fly) या बीमारी न हो, जो जापान की खेती को नुकसान पहुंचा सके।

जापानी क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारत के उत्तर प्रदेश स्थित एक Vapour Heat Treatment (VHT) सेंटर का निरीक्षण किया था। यह वही प्रक्रिया होती है जिसमें आमों को गर्म और नियंत्रित वातावरण में रखकर कीटाणु और फल मक्खियों को खत्म किया जाता है। जांच के दौरान अधिकारियों को इस प्रक्रिया में कई कमियां मिलीं, जिसके बाद जापान ने तत्काल प्रभाव से भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी।

20 साल पहले भी लगा था बैन

यह पहली बार नहीं है जब जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया हो। इससे पहले 1986 में भी जापान ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी थी। उस समय भी कारण फल मक्खी और कीट संक्रमण का खतरा बताया गया था।

करीब 20 साल तक यह प्रतिबंध जारी रहा और फिर 2006 में भारत और जापान के बीच समझौते के बाद दोबारा भारतीय आमों को जापानी बाजार में एंट्री मिली। इसके लिए भारत को खास क्वारंटाइन और Vapour Heat Treatment सिस्टम तैयार करना पड़ा था।

किन आमों पर पड़ा असर?

इस प्रतिबंध का असर भारत की कई मशहूर किस्मों पर पड़ा है, जिनमें:

  • अल्फांसो (महाराष्ट्र)
  • केसर (गुजरात)
  • लंगड़ा (उत्तर भारत)
  • बंगनपल्ली (आंध्र प्रदेश)

जैसी प्रीमियम वैरायटी शामिल हैं। जापान में खासतौर पर अल्फांसो और केसर आमों की काफी मांग रहती थी क्योंकि इन्हें प्रीमियम और हाई-क्वालिटी फल माना जाता है।

भारत को कितना नुकसान हो सकता है?

हालांकि जापान भारत का सबसे बड़ा आम आयातक देश नहीं है, लेकिन यह एक प्रीमियम मार्केट माना जाता है जहां भारतीय आम ऊंची कीमतों पर बिकते हैं। ऐसे में इस प्रतिबंध से निर्यातकों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने पिछले साल जापान को लाखों डॉलर मूल्य के ताजे और प्रोसेस्ड आम निर्यात किए थे। इस बार प्रतिबंध लगने से निर्यात सीजन के बीच कारोबार प्रभावित हो गया है।

पहले से मुश्किल दौर से गुजर रहा था आम कारोबार

इस साल भारतीय आम उत्पादकों को पहले से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में भीषण गर्मी और हीटवेव के कारण अल्फांसो की फसल प्रभावित हुई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एयर फ्रेट और लॉजिस्टिक्स लागत भी काफी बढ़ गई है। ऐसे में जापान का यह फैसला निर्यातकों के लिए डबल झटका माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल जापान ने यह साफ नहीं किया है कि यह प्रतिबंध कब तक जारी रहेगा। जापानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक भारत अपनी क्वारंटाइन और ट्रीटमेंट सुविधाओं में सुधार नहीं करता, तब तक आयात दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। भारत की APEDA और संबंधित एजेंसियां अब इस मामले को सुलझाने की कोशिश में जुटी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत जल्द तकनीकी खामियों को दूर कर लेता है, तो आने वाले सीजन में जापानी बाजार दोबारा खुल सकता है। लेकिन फिलहाल इस फैसले ने भारतीय आम उद्योग की प्रतिष्ठा और कारोबार दोनों को बड़ा झटका दिया है।

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