AIOCD का बड़ा ऐलान: ऑनलाइन दवा बिक्री और नई नीतियों के विरोध में आज भारत बंद जैसी स्थिति

देशभर में आज कई दवा दुकानें बंद रह सकती हैं क्योंकि ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री, ई-फार्मेसी और नई दवा नीतियों से छोटे मेडिकल स्टोर कारोबारियों पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस बंद का असर आम मरीजों और दवा सप्लाई सिस्टम पर भी देखने को मिल सकता है।

May 20, 2026 - 11:35
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AIOCD का बड़ा ऐलान: ऑनलाइन दवा बिक्री और नई नीतियों के विरोध में आज भारत बंद जैसी स्थिति

देशभर में आज दवा दुकानों की हड़ताल को लेकर लोगों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) की ओर से किए गए बंद के ऐलान के बाद कई राज्यों में मेडिकल स्टोर्स के शटर बंद रहने की संभावना जताई जा रही है। संगठन का दावा है कि यह हड़ताल छोटे और मध्यम स्तर के दवा कारोबारियों के हितों की रक्षा के लिए की जा रही है।

AIOCD का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और तेजी से बढ़ती ई-फार्मेसी कंपनियों की वजह से पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। संगठन का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी और नियमों के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं, जिससे न केवल छोटे दुकानदारों को नुकसान हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, सरकार से लंबे समय से मांग की जा रही थी कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री पर रोक लगे। हालांकि अब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होने के कारण हड़ताल का फैसला लिया गया है।

बताया जा रहा है कि इस बंद का असर कई बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि कुछ जरूरी मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों के अंदर संचालित फार्मेसी सेवाएं खुली रह सकती हैं ताकि आपातकालीन मरीजों को परेशानी न हो। फिर भी आम लोगों को पहले से जरूरी दवाएं खरीदने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि दवा वितरण प्रणाली में अचानक रुकावट आने से बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और नियमित दवा लेने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हार्ट पेशेंट्स के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

AIOCD ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ बड़ी ई-कॉमर्स और ई-फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। संगठन के मुताबिक इससे छोटे मेडिकल स्टोर्स आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।

वहीं दूसरी ओर डिजिटल हेल्थ सेक्टर से जुड़े लोग मानते हैं कि ऑनलाइन फार्मेसी सेवाओं ने दूरदराज इलाकों तक दवाओं की पहुंच आसान बनाई है। उनका तर्क है कि तकनीक के जरिए मरीजों को सुविधा मिल रही है और प्रतिस्पर्धा से कीमतों में भी राहत मिलती है। ऐसे में सरकार के सामने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित विभाग इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। यदि जरूरत पड़ी तो संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी की जा सकती है ताकि मरीजों को कम से कम परेशानी हो और दवा सप्लाई व्यवस्था सामान्य बनी रहे।

देश में पहले भी दवा कारोबारियों की ओर से कई बार विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन इस बार का बंद काफी व्यापक माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग मेडिकल स्टोर्स के समर्थन में हैं तो कुछ का कहना है कि मरीजों की सुविधा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और AIOCD के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। तब तक आम लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी जरूरी दवाओं का स्टॉक पहले से सुनिश्चित कर लें और किसी भी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय स्थानीय प्रशासन और मेडिकल संस्थानों की आधिकारिक जानकारी पर ध्यान दें।

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