LAC पर चीन के J-20 को लेकर क्यों मचा है हल्ला? 2018 में ही भारतीय Su-30MKI ने कर लिया था डिटेक्ट

चीन ने पूर्वी लद्दाख के पास LAC पर अपने स्टील्थ फाइटर जेट J-20 Mighty Dragon की तैनाती बढ़ा दी है। इसे लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय वायुसेना का Su-30MKI इस विमान को 2018 में ही अपने रडार पर सफलतापूर्वक ट्रैक कर चुका था। ऐसे में J-20 की स्टील्थ क्षमता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

Jul 29, 2026 - 12:58
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LAC पर चीन के J-20 को लेकर क्यों मचा है हल्ला? 2018 में ही भारतीय Su-30MKI ने कर लिया था डिटेक्ट

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। दोनों देशों ने सीमा के पास अपने सैनिकों, एयर डिफेंस सिस्टम और आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती में तेजी लाई है। हाल ही में चीन द्वारा पूर्वी लद्दाख और तिब्बत क्षेत्र के एयरबेस पर अपने अत्याधुनिक J-20 Mighty Dragon स्टील्थ फाइटर जेट की बढ़ती मौजूदगी ने एक बार फिर रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। चीनी मीडिया लगातार J-20 को दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक बताता रहा है और इसे भारत के लिए बड़ी चुनौती के रूप में पेश करता है। लेकिन इस पूरे मामले का एक दूसरा पक्ष भी है, जिस पर रक्षा विशेषज्ञ बार-बार जोर देते हैं।

 उनका कहना है कि चीन जिस J-20 की स्टील्थ क्षमता का प्रचार करता है, उसे भारतीय वायुसेना का Su-30MKI लड़ाकू विमान वर्ष 2018 में ही अपने रडार पर सफलतापूर्वक डिटेक्ट कर चुका था। यही कारण है कि LAC पर J-20 की तैनाती को लेकर जितनी चर्चा हो रही है, उतने ही सवाल उसकी वास्तविक स्टील्थ क्षमता को लेकर भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल किसी एक विमान की तकनीक पर नहीं, बल्कि पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और पायलट की क्षमता पर निर्भर करता है।

चीन का Chengdu J-20 Mighty Dragon उसकी वायुसेना का पहला पांचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) का स्टील्थ फाइटर जेट है। इसे अमेरिकी F-22 Raptor और F-35 Lightning II जैसे विमानों की श्रेणी में रखा जाता है। J-20 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उसकी रडार क्रॉस सेक्शन (Radar Cross Section) कम रहे और दुश्मन के रडार के लिए उसे पहचानना मुश्किल हो। इसके अलावा यह लंबी दूरी तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सेंसर, डेटा लिंक और एडवांस एवियोनिक्स से लैस है। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में इस विमान का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया है और उसे अपने पश्चिमी थिएटर कमांड के एयरबेस पर तैनात किया है, जो भारत की सीमा के अपेक्षाकृत करीब हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इसका उद्देश्य केवल ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना भी है। हालांकि किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान की वास्तविक क्षमता केवल उसके प्रचार से नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन से तय होती है।

J-20 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उसकी स्टील्थ तकनीक को लेकर होती है। आम लोगों में यह धारणा होती है कि स्टील्थ विमान रडार पर दिखाई ही नहीं देते, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। स्टील्थ तकनीक का उद्देश्य विमान को पूरी तरह अदृश्य बनाना नहीं, बल्कि उसकी पहचान की संभावना को कम करना होता है। यदि विरोधी देश के पास आधुनिक मल्टी-बैंड रडार, लंबी दूरी के सेंसर, नेटवर्क आधारित निगरानी प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस मौजूद हो, तो स्टील्थ विमान भी डिटेक्ट किए जा सकते हैं। यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ वर्ष 2018 की उस घटना का उल्लेख करते हैं, जब भारतीय वायुसेना के Su-30MKI ने अपने N011M Bars PESA Radar की मदद से J-20 को सफलतापूर्वक ट्रैक किया था। यह घटना उस समय काफी चर्चा में रही थी क्योंकि इससे यह संकेत मिला कि J-20 की स्टील्थ क्षमता हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं है। हालांकि रक्षा मामलों में कई जानकारियां आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की जातीं, फिर भी इस घटना को अक्सर आधुनिक रडार तकनीक की क्षमता के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

भारतीय वायुसेना का Su-30MKI आज भी दुनिया के सबसे सक्षम 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह केवल एक फाइटर जेट नहीं बल्कि लंबी दूरी तक मार करने, भारी हथियार ले जाने, मल्टी-रोल मिशन पूरा करने और नेटवर्क आधारित युद्ध संचालन में सक्षम प्लेटफॉर्म है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी उड़ान क्षमता, सुपर मैन्युवरबिलिटी और शक्तिशाली रडार सिस्टम है। भारतीय वायुसेना लगातार Su-30MKI का अपग्रेड भी कर रही है, जिसमें आधुनिक रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, नई मिसाइलें और उन्नत एवियोनिक्स शामिल किए जा रहे हैं। इसके अलावा भारत के पास अब राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान भी हैं, जिनमें Meteor जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें लगी हैं। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी संभावित संघर्ष में भारत के पास केवल एक विमान नहीं बल्कि बहुस्तरीय एयर कॉम्बैट क्षमता मौजूद है।

LAC पर चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में भारत ने भी अपनी तैयारियां लगातार मजबूत की हैं। पूर्वी लद्दाख में भारत ने कई एयरबेस को आधुनिक बनाया है, अग्रिम मोर्चों पर फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ाई है और एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत किया है। S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली, आधुनिक रडार नेटवर्क और हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना का अनुभव भारत की ताकत माने जाते हैं। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना नियमित रूप से युद्धाभ्यास कर रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की J-20 तैनाती निश्चित रूप से निगरानी और सतर्कता का विषय है, लेकिन इसे देखकर घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत की एयर डिफेंस क्षमता भी लगातार विकसित हो रही है।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य का हवाई युद्ध केवल स्टील्थ तकनीक पर आधारित नहीं होगा। आज के दौर में नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर, Artificial Intelligence, Electronic Warfare, Data Fusion, Satellite Surveillance और Integrated Air Defence Systems कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी देश के पास मजबूत रडार नेटवर्क, कई स्रोतों से मिलने वाली खुफिया जानकारी और उन्नत मिसाइल प्रणाली हो, तो स्टील्थ विमान की बढ़त काफी हद तक कम हो सकती है। भारत इसी दिशा में तेजी से काम कर रहा है। स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है, जिसे भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान माना जा रहा है। इसके अलावा DRDO और भारतीय वायुसेना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों पर भी निवेश कर रहे हैं।

फिलहाल चीन द्वारा LAC के पास J-20 की तैनाती को रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सैन्य शक्ति का मूल्यांकन केवल एक हथियार प्रणाली के आधार पर नहीं किया जा सकता। भारत की आधुनिक वायुसेना, मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क, अनुभवी पायलट, उन्नत मिसाइलें और बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली उसे किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम बनाती हैं। वर्ष 2018 में Su-30MKI द्वारा J-20 का डिटेक्शन इसी बात का संकेत माना जाता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक के साथ-साथ प्रशिक्षण, रणनीति और एकीकृत रक्षा व्यवस्था की भी उतनी ही अहम भूमिका होती है। आने वाले वर्षों में भारत और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है, लेकिन फिलहाल भारत अपनी वायु शक्ति को लगातार मजबूत कर रहा है और LAC पर हर गतिविधि पर करीबी नजर बनाए हुए है। यही वजह है कि J-20 को लेकर जितनी चर्चा है, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण भारत की तैयारियां और उसकी समग्र रक्षा क्षमता मानी जा रही है।

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