CJP के संसद मार्च में RAF जवान ने चलाई पेलेट गन? जांच में बड़ा खुलासा, CRPF ने शुरू की आंतरिक पड़ताल

20 जुलाई को CJP के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती इनकार के बाद अब Rapid Action Force (RAF) और CRPF ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। मेडिकल रिपोर्ट, वीडियो और घायल प्रदर्शनकारियों के दावों की जांच की जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस अब भी पेलेट गन इस्तेमाल करने से इनकार कर रही है।

Jul 27, 2026 - 11:15
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CJP के संसद मार्च में RAF जवान ने चलाई पेलेट गन? जांच में बड़ा खुलासा, CRPF ने शुरू की आंतरिक पड़ताल

CJP के संसद मार्च में RAF जवान ने चलाई पेलेट गन? जांच में बड़ा खुलासा, अब CRPF करेगी सच्चाई की पड़ताल

20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित CJP (Cockroach Janta Party) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुरुआत में जिन आरोपों को दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह खारिज कर दिया था, अब वही मामला केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की आंतरिक जांच तक पहुंच गया है। Rapid Action Force (RAF), जो CRPF की विशेष दंगा-नियंत्रण इकाई है, ने अपने जवानों द्वारा कथित रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रदर्शन के बाद कई छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि भीड़ को तितर-बितर करने के दौरान उन पर पेलेट गन चलाई गई। कुछ घायलों ने दावा किया कि उनके शरीर और चेहरे पर धातु के छोटे छर्रे लगे, जबकि अस्पतालों में उनके मेडिकल रिकॉर्ड में भी पेलेट जैसी चोटों का उल्लेख होने की बात सामने आई। मीडिया रिपोर्टों में ऐसे कई मामलों का जिक्र किया गया है जिनमें घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज किया गया।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस लगातार यह कहती रही है कि उसके जवानों ने किसी भी प्रकार की पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस का यह भी कहना है कि उसके शस्त्रागार में पेलेट गन शामिल ही नहीं हैं और इस तरह के आरोप भ्रामक हैं।

हालांकि, विवाद तब और बढ़ गया जब अधिकारियों ने पुष्टि की कि RAF के पास भीड़ नियंत्रण के लिए 12-बोर पंप-एक्शन गन उपलब्ध होती हैं, जिन्हें विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार इनका उपयोग केवल तब किया जाना चाहिए जब सुरक्षा बलों पर गंभीर खतरा हो और इन्हें इस तरह चलाया जाना चाहिए कि चोटें न्यूनतम रहें। इन्हीं दावों की सत्यता अब जांच का विषय है।

CRPF और RAF की जांच में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, घटनास्थल की तस्वीरें, ड्यूटी पर मौजूद जवानों की तैनाती, आदेशों की श्रृंखला और घायल प्रदर्शनकारियों के मेडिकल दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार पहले तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा, उसके बाद आवश्यकता पड़ने पर औपचारिक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई जा सकती है।

मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या छात्रों के खिलाफ पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी और यदि हां, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

इस बीच कुछ घायल प्रदर्शनकारियों ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्हें सीधे RAF के जवानों की ओर से चली गोलीनुमा छर्रों से चोट लगी। वहीं दूसरी तरफ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

20 जुलाई का 'संसद चलो' मार्च उस समय हिंसक हो गया था जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश हुई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसी कार्रवाई के दौरान पेलेट गन इस्तेमाल होने के आरोप सामने आए, जिन्हें लेकर अब तक विरोधाभासी दावे किए जा रहे हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि पेलेट गन चलाई गई थी या नहीं। एक ओर घायल प्रदर्शनकारी, मेडिकल दस्तावेज और कुछ मीडिया रिपोर्टें इस संभावना की ओर इशारा करती हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है। अब RAF और CRPF की आंतरिक जांच से यह तय होने की उम्मीद है कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ, क्या मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया गया और यदि किसी स्तर पर चूक हुई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

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