डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी! रूस से सबक लेकर PM मोदी की नई आर्थिक अपील
वैश्विक आर्थिक तनाव और डॉलर आधारित सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता के बीच भारत अब नई रणनीति की ओर बढ़ रहा है। रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद दुनिया ने देखा कि डॉलर सिस्टम पर अधिक भरोसा किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निवेश और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर बड़ा संदेश दिया है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी डॉलर के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल खरीद और विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा डॉलर में ही होता है। लेकिन हाल के वर्षों में कई देशों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। कई रूसी बैंकों को ग्लोबल पेमेंट सिस्टम से बाहर कर दिया गया और विदेशी मुद्रा भंडार तक सीमित कर दिया गया। इससे दुनिया को यह एहसास हुआ कि डॉलर आधारित व्यवस्था किसी भी देश के लिए जोखिम बन सकती है।
भारत भी अब धीरे-धीरे डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। सरकार स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने और विदेशी व्यापार में रुपये के उपयोग को मजबूत करने पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मंचों से आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और उत्पादक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक सोना खरीदने की बजाय निवेश को उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेक्टर की ओर मोड़ना अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में शामिल है। हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। यही कारण है कि सरकार समय-समय पर लोगों को वित्तीय निवेश के बेहतर विकल्प अपनाने की सलाह देती रही है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि देश में पूंजी उत्पादक क्षेत्रों में लगेगी तो रोजगार, निर्माण और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विदेशी दबाव का असर कम पड़ेगा।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सोना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ निवेश नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा भी है। इसलिए सरकार का उद्देश्य सोने को पूरी तरह हतोत्साहित करना नहीं, बल्कि संतुलित निवेश को बढ़ावा देना है।
वैश्विक स्तर पर चीन, रूस और कई अन्य देश भी डॉलर के विकल्प तलाश रहे हैं। ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने की चर्चा लगातार तेज हो रही है। भारत भी इस रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
आने वाले समय में भारत की आर्थिक नीति का फोकस आत्मनिर्भरता, स्थानीय मुद्रा में व्यापार और वैश्विक वित्तीय जोखिमों को कम करने पर रहने की संभावना है। ऐसे में डॉलर पर निर्भरता कम करना सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
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