Parliament Monsoon Session LIVE: लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित, विपक्ष के हंगामे के बीच ओम बिरला की अपील बेअसर

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों के नारेबाजी और विरोध के बीच स्पीकर ओम बिरला लगातार व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन शोर-शराबा नहीं थमा। आखिरकार सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

Jul 20, 2026 - 12:10
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Parliament Monsoon Session LIVE: लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित, विपक्ष के हंगामे के बीच ओम बिरला की अपील बेअसर

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। पहले ही दिन लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के तीखे विरोध और लगातार नारेबाजी की भेंट चढ़ गई। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। अंततः लगातार व्यवधान के कारण कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

मानसून सत्र के पहले दिन ही विपक्ष सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की तैयारी के साथ सदन में पहुंचा था। विपक्षी दलों ने विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े विषयों पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई। जैसे-जैसे कार्यवाही आगे बढ़ी, सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया और नारेबाजी तेज हो गई। विपक्षी सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किया, जिससे प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित कार्य प्रभावित हुए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से कहा कि संसद बहस और संवाद का मंच है तथा जनता ने उन्हें चर्चा के माध्यम से अपनी बात रखने के लिए चुना है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से आग्रह किया कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें और नियमों का पालन करें। हालांकि उनकी अपील के बावजूद हंगामा थमता नहीं दिखा और विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा।

संसद के मानसून सत्र को इस बार राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार कई अहम विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में पहले ही दिन का गतिरोध इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।

सदन में लगातार हो रहे हंगामे के बीच अध्यक्ष ने कई बार यह स्पष्ट किया कि यदि सांसद नियमों का पालन नहीं करेंगे तो संसदीय कार्य सुचारु रूप से नहीं चल पाएगा। उन्होंने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन उसे संसदीय मर्यादाओं के भीतर रहकर ही व्यक्त किया जाना चाहिए। इसके बावजूद विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे और कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।

मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही लोकसभा सचिवालय ने सांसदों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी। इसमें संसद परिसर के भीतर धरना, प्रदर्शन, पोस्टर, प्लेकार्ड और अन्य विरोध प्रदर्शनों से बचने की सलाह दी गई थी, ताकि सदन की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के संचालित हो सके। इसके बावजूद पहले ही दिन का घटनाक्रम इस सलाह के विपरीत दिखाई दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। सरकार जहां अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनहित और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में भी सदन में बार-बार व्यवधान देखने को मिल सकता है।

संसद के बाहर भी विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कई नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी मांगों पर चर्चा कराई जानी चाहिए और सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों से बचने की कोशिश कर रही है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि वह संसद में सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही चलना आवश्यक है।

दोपहर 12 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित होने के बाद सभी की नजरें इस बात पर टिक गईं कि सदन दोबारा शुरू होने पर क्या विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा या फिर चर्चा के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिश होगी। संसदीय कार्य मंत्री और विभिन्न दलों के नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि सदन का कामकाज सामान्य रूप से चल सके।

लोकसभा में पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिया है कि यह मानसून सत्र राजनीतिक रूप से बेहद गर्म रहने वाला है। महत्वपूर्ण विधेयकों, राष्ट्रीय मुद्दों और विपक्ष के विरोध के बीच संसद के भीतर हर दिन नई रणनीति और नए राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में सरकार के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना और विपक्ष के लिए अपनी आवाज प्रभावी ढंग से उठाना दोनों ही बड़ी चुनौती साबित होंगे।

फिलहाल, संसद का पहला दिन हंगामे, नारेबाजी और कार्यवाही स्थगित होने के कारण सुर्खियों में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी बैठकों में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कम होता है या मानसून सत्र के बाकी दिनों में भी इसी तरह का टकराव जारी रहता है।

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