'छात्रों के सिर खुले हुए आए थे, हिटलर से तुलना क्यों न करें?' लाठीचार्ज पर भड़के अखिलेश यादव, BJP पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने CJP प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों के सिर फटे हुए थे और ऐसी कार्रवाई की तुलना हिटलरशाही से क्यों न की जाए। साथ ही उन्होंने सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदर्शन के बाद जब उन्होंने छात्रों को देखा तो कई के सिर फटे हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा, तो इसकी तुलना हिटलरशाही से क्यों नहीं की जानी चाहिए।
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने वाले युवाओं पर बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब घायल छात्र उनके पास पहुंचे तो उनके सिर पर चोट के निशान थे, जिसे देखकर वे बेहद व्यथित हुए।
अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि युवाओं की समस्याओं को सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना हर नागरिक का अधिकार है और यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं तो सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि बल प्रयोग का।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि इतिहास में तानाशाही शासन की पहचान विरोध की आवाज को दबाने से होती रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जब छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है तो लोग हिटलरशाही की तुलना करते हैं और सरकार को इस पर आत्ममंथन करना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP आंदोलन और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं में पहले से ही असंतोष है। ऐसे में यदि उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनने के बजाय उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी ने भी सरकार की आलोचना की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि छात्रों की मांगों को संवेदनशीलता से सुना जाना चाहिए और यदि किसी कार्रवाई में जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और सुरक्षा एजेंसियां परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करती हैं। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों के प्रदर्शन और उस पर हुई कार्रवाई आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श का बड़ा मुद्दा बनी रह सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को युवाओं और शिक्षा से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई का पक्ष रख रहा है।
फिलहाल, अखिलेश यादव के बयान ने इस विवाद को और गर्मा दिया है। छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, सरकार की भूमिका और विपक्ष के आरोपों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस पूरे मामले में आगे क्या राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।
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