अडानी ग्रुप की कंपनियों में ₹15,000 करोड़ से अधिक की महा-डील, बाजार में हलचल; जानें किस-किसने खरीदे शेयर
अडानी ग्रुप की कंपनियों (Adani Enterprises और Adani Ports) में पिछले एक महीने के दौरान ₹15,000 करोड़ से अधिक की बड़ी ब्लॉक डील हुई है। इस सौदे की सबसे बड़ी बात यह है कि देश के सबसे बड़े घरेलू निवेशक SBI Mutual Fund ने अकेले ₹5,747 करोड़ के शेयर खरीदकर बड़ा भरोसा जताया है। अमेरिकी न्याय विभाग (US DoJ) से गौतम अडानी को मिली क्लीन चिट और ग्रुप के मजबूत नतीजों के बाद आए इस भारी निवेश के कारण आज शेयर बाजार की नजरें इन शेयरों पर टिकी हैं।
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए अडानी ग्रुप की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान ₹15,000 करोड़ से अधिक के शेयरों का बड़ा लेन-देन हुआ है। यह भारी-भरकम ब्लॉक डील ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार मुनाफावसूली कर रहे हैं। इन सबके बीच अडानी ग्रुप के शेयरों में वैश्विक और घरेलू स्तर के बड़े फंड्स ने जिस तरह से दिलचस्पी दिखाई है, उसने दलाल स्ट्रीट के विश्लेषकों और आम निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, इस ब्लॉक डील गतिविधि के तहत मुख्य रूप से अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस जैसी दिग्गज कंपनियों के करोड़ों शेयरों का मालिकाना हक बदला है।
इस पूरी मेगा डील की सबसे बड़ी और हालिया सुर्खी देश के सबसे बड़े परिसंपत्ति प्रबंधक एसबीआई म्यूचुअल फंड और अमेरिका की प्रसिद्ध निवेश फर्म जीक्यूजी पार्टनर्स के बीच का सौदा रहा। राजीव जैन के नेतृत्व वाली जीक्यूजी पार्टनर्स ने अपने 'इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड' के माध्यम से अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बाजार में ब्लॉक विंडो के जरिए उतारा था, जिसे एसबीआई म्यूचुअल फंड ने हाथों-हाथ खरीद लिया। अकेले इस लेनदेन का मूल्य करीब ₹5,747 करोड़ आंका गया है, जिसमें एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अडानी एंटरप्राइजेज के लगभग 1.64 करोड़ शेयर (1.3% इक्विटी) और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के 63.65 लाख शेयर (0.52% हिस्सेदारी) अपने नाम किए हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि जीक्यूजी पार्टनर्स द्वारा की गई यह बिकवाली किसी घबराहट या नकारात्मक भावना का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से एक रणनीतिक 'पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग' और मुनाफावसूली का मामला है। जीक्यूजी पार्टनर्स ने साल 2023 के शुरुआती महीनों में हिंडनबर्ग विवाद के बाद बेहद कम कीमतों पर अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी निवेश किया था। पिछले एक से डेढ़ साल में इन शेयरों की कीमतों में हुई जबरदस्त रिकवरी और निवेशकों को मिले मल्टीबैगर रिटर्न के बाद, वैश्विक फंड्स के लिए आंशिक मुनाफावसूली करना एक सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है। सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि विदेशी फंड की इस बिकवाली को भारतीय बाजार के सबसे भरोसेमंद घरेलू संस्थान यानी एसबीआई एमएफ ने पूरी तरह संभाल लिया, जो घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।
अगर हम कंपनीवार इस ₹15,000 करोड़ की ब्लॉक डील के आंकड़ों को समझें, तो सबसे बड़ी गतिविधि अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) में देखने को मिली। अडानी पोर्ट्स में अकेले लगभग ₹7,400 करोड़ मूल्य के शेयरों की अदला-बदली हुई है, जहां दिग्गज वैश्विक एसेट मैनेजर 'कैपिटल ग्रुप' से जुड़ी संस्थाओं ने उभरते बाजारों के अन्य निवेशकों से बड़ी हिस्सेदारी खरीदी है। इसके बाद ग्रुप की फ्लैगशिप और नए व्यवसायों को शुरू करने वाली कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का नंबर आता है, जिसमें कुल मिलाकर ₹6,200 करोड़ से अधिक की संचयी ब्लॉक डील पूरी की जा चुकी हैं। एसबीआई म्यूचुअल फंड ने पिछले महीने भी इसी कंपनी में करीब ₹1,435 करोड़ के शेयर खरीदे थे, जिससे साफ है कि वे लगातार अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर रहे हैं।
आम खुदरा निवेशकों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि ब्लॉक डील की यह प्रक्रिया क्या होती है और इसका शेयरों पर क्या असर पड़ता है। शेयर बाजार के नियमों के अनुसार, जब दो बड़े संस्थागत निवेशक आपस में मिलकर किसी कंपनी के कम से कम 5 लाख शेयर या ₹10 करोड़ से अधिक मूल्य के सौदे पहले से तय कीमत पर करते हैं, तो उसे ब्लॉक डील विंडो कहा जाता है। चूंकि ये सौदे आम रिटेल मार्केट की ओपन स्क्रीन पर नहीं होते, इसलिए इनसे आम दिनों की तरह बाजार के सामान्य ट्रेडिंग ऑवर्स में अचानक कोई भारी गिरावट या पैनिक नहीं आता। लेकिन जब एसबीआई म्यूचुअल फंड जैसी बड़ी सरकारी पृष्ठभूमि वाली संस्था इतने बड़े पैमाने पर निवेश करती है, तो आम निवेशकों को यह संदेश जाता है कि कंपनी के फंडामेंटल्स लंबी अवधि के लिए बेहद सुरक्षित और आकर्षक हैं।
अडानी ग्रुप के प्रति संस्थागत निवेशकों के इस बदलते और सकारात्मक नजरिए के पीछे कुछ बेहद महत्वपूर्ण और हालिया कारण जिम्मेदार हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण यह है कि यूनाइटेड स्टेट्स (US) के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने चेयरमैन गौतम अडानी और उनके सहयोगियों पर लगे कथित वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों को पूरी तरह से हटा दिया है। इस बड़ी कानूनी क्लीन चिट के बाद ग्रुप के ऊपर पिछले कई महीनों से मंडरा रहा अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी अनिश्चितता का खतरा पूरी तरह टल गया है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि अडानी ग्रुप ने अपने पिछले दोनों बड़े संकटों (2023 के हिंडनबर्ग आरोप और 2024 की अमेरिकी जांच) को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है और अब ग्रुप का फोकस सिर्फ बिजनेस को बढ़ाने पर है।
दूसरा बड़ा कारण अडानी पोर्टफोलियो का अब तक का सबसे बेहतरीन वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के सालाना नतीजों में अडानी ग्रुप ने भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) दर्ज किया है, जो ₹1,52,967 करोड़ रहा। ग्रुप की कंपनियों का कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) भी ₹94,834 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। ग्रुप ने अपने पुराने कर्ज को कम करते हुए बैलेंस शीट को बेहद अनुशासित और मजबूत बनाया है, जिससे उनकी घरेलू क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड होकर 'A-' या उससे ऊपर पहुंच चुकी है। यह मजबूत कैश फ्लो ही बड़े निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।
अंततः, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस ₹15,000 करोड़ की ब्लॉक डील श्रृंखला के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों का इन्वेस्टर बेस पहले से कहीं अधिक गहरा और संतुलित हो गया है। पहले जहां अडानी ग्रुप की तेजी मुख्य रूप से विदेशी फंड्स (FII) के निवेश पर निर्भर करती थी, वहीं अब भारतीय घरेलू म्यूचुअल फंड्स की इतनी बड़ी भागीदारी ने शेयरों को एक मजबूत डाउनसाइड प्रोटेक्शन यानी सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है। आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन, डेटा सेंटर्स, नवीकरणीय ऊर्जा और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के चालू होने से इन शेयरों की विकास गति और तेज होने की उम्मीद है, जिससे आज पूरे बाजार की नजरें इन पर टिकी हुई हैं।
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