अमेरिका में EB-2 वीज़ा लिमिट खत्म, भारतीय प्रोफेशनल्स पर बढ़ेगा असर; ग्रीन कार्ड का इंतजार और लंबा

अमेरिका ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के EB-2 ग्रीन कार्ड वीज़ा की तय सीमा पूरी होने की घोषणा कर दी है। इसका असर हजारों भारतीय आईटी इंजीनियरों, डॉक्टरों और हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, जिन्हें अब ग्रीन कार्ड के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

May 27, 2026 - 11:17
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अमेरिका में EB-2 वीज़ा लिमिट खत्म, भारतीय प्रोफेशनल्स पर बढ़ेगा असर; ग्रीन कार्ड का इंतजार और लंबा

अमेरिका में नौकरी कर रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के EB-2 रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड वीज़ा की निर्धारित सीमा पूरी तरह खत्म हो चुकी है। इसके बाद अब इस श्रेणी में भारतीय नागरिकों को नए ग्रीन कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे, जब तक अगला वित्त वर्ष शुरू नहीं हो जाता।

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर अमेरिका में H-1B वीज़ा पर काम कर रहे भारतीय आईटी इंजीनियरों, डॉक्टरों, रिसर्चर्स और अन्य हाई-स्किल्ड कर्मचारियों पर पड़ने वाला है। बड़ी संख्या में भारतीय पिछले कई वर्षों से EB-2 कैटेगरी के जरिए अमेरिकी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।

EB-2 वीज़ा अमेरिका की रोजगार आधारित दूसरी प्राथमिकता श्रेणी है, जो एडवांस डिग्री या विशेष कौशल रखने वाले विदेशी प्रोफेशनल्स को दी जाती है। भारतीयों की बड़ी संख्या हर साल इस श्रेणी में आवेदन करती है, लेकिन अमेरिकी कानून के तहत हर देश के लिए सीमित कोटा तय होने के कारण भारत में बैकलॉग लगातार बढ़ता जा रहा है।

अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार कोई भी देश कुल रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का लगभग 7 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नहीं पा सकता। भारत जैसे बड़े देशों से आने वाले आवेदनों की संख्या बहुत ज्यादा होने के कारण यह सीमा जल्दी भर जाती है। यही वजह है कि भारतीयों को ग्रीन कार्ड के लिए कई-कई साल इंतजार करना पड़ रहा है।

ताजा Visa Bulletin के मुताबिक EB-2 इंडिया की Final Action Date कई साल पीछे चल रही है। इसका मतलब यह है कि जिन भारतीयों ने हाल के वर्षों में आवेदन किया है, उन्हें अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में यह इंतजार 10 साल से भी ज्यादा का हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के दौरान unused visas को रोजगार आधारित श्रेणियों में ट्रांसफर किया गया था, जिससे कुछ राहत मिली थी। लेकिन अब अतिरिक्त वीज़ा संख्या खत्म होने के बाद फिर से दबाव बढ़ गया है।

ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी का असर सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहता। इससे अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। कई लोग नौकरी बदलने, घर खरीदने या लंबे समय की निवेश योजनाओं को टाल देते हैं। वहीं बच्चों की पढ़ाई और वीज़ा स्टेटस को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती है।

इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में स्थिति और कठिन हो सकती है। अगर आवेदन की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो अमेरिकी प्रशासन भविष्य में कुछ समय के लिए इस श्रेणी को “Unavailable” भी घोषित कर सकता है।

हालांकि जिन लोगों के आवेदन पहले से प्रक्रिया में हैं, उनके केस रद्द नहीं होंगे। लेकिन नए वीज़ा नंबर उपलब्ध होने तक उनके आवेदन को अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाएगी।

इस बीच कई भारतीय प्रोफेशनल्स अब वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कुछ लोग EB-1 जैसी तेज श्रेणियों की ओर जा रहे हैं, जबकि कई लोग कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे देशों में बेहतर इमिग्रेशन अवसर तलाश रहे हैं।

अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में भारतीय प्रोफेशनल्स की बड़ी भूमिका मानी जाती है। ऐसे में बढ़ते वीज़ा बैकलॉग को लेकर अमेरिकी कंपनियां भी चिंता जता चुकी हैं। इमिग्रेशन सुधार और per-country cap हटाने की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन अब तक कोई बड़ा बदलाव लागू नहीं हो पाया है।

फिलहाल भारत के हजारों स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका का ग्रीन कार्ड सपना और लंबा होता नजर आ रहा है।

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