ट्रंप की ईरान को धमकियां बढ़ा सकती हैं नया 'फॉरएवर वॉर', विशेषज्ञों ने अमेरिका को दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर आक्रामक रणनीति और सैन्य धमकियों ने एक बार फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा तो यह एक लंबे और महंगे "फॉरएवर वॉर" में बदल सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लगातार दी जा रही कड़ी चेतावनियों और सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बीच कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यह टकराव अमेरिका को एक और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में धकेल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का परिणाम केवल कुछ दिनों की लड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक ऐसे संघर्ष में बदल सकता है जिससे बाहर निकलना अमेरिका के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों के रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर टकराव लगातार बढ़ता गया है। ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति ने इस तनाव को और हवा दी है, जहां ईरान पर दबाव बनाने के लिए सैन्य शक्ति और कड़े संदेशों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका पहले भी अफगानिस्तान और इराक जैसे लंबे युद्धों का सामना कर चुका है, जहां शुरुआती सैन्य सफलता के बाद भी वर्षों तक संघर्ष जारी रहा। इन्हीं अनुभवों को देखते हुए रणनीतिक विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका के लिए एक नई "फॉरएवर वॉर" यानी कभी खत्म न होने वाली जंग साबित हो सकता है।
ईरान कोई छोटा सैन्य प्रतिद्वंद्वी नहीं है। उसकी सेना, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय नेटवर्क उसे मध्य-पूर्व में एक प्रभावशाली ताकत बनाते हैं। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य संघर्ष शुरू होता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने, तेल आपूर्ति मार्ग और सहयोगी देश भी इस संघर्ष की चपेट में आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास जवाबी कार्रवाई के कई विकल्प मौजूद हैं। वह मिसाइल हमलों, साइबर हमलों या अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है। इससे संघर्ष और ज्यादा जटिल हो सकता है और अमेरिका को लंबे समय तक सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व पहले से ही कई संकटों से गुजर रहा है। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। दुनिया के कई देश चिंता जता रहे हैं कि अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो इसका असर तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप की रणनीति को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग मानते हैं कि ईरान पर कड़ा दबाव बनाना जरूरी है ताकि वह अपनी सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सीमित करे। वहीं दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि केवल सैन्य ताकत के इस्तेमाल से समस्या का समाधान नहीं होगा और इससे अमेरिका एक लंबे संघर्ष में फंस सकता है।
इराक और अफगानिस्तान के अनुभवों का हवाला देते हुए कई विशेषज्ञ कहते हैं कि आधुनिक युद्ध केवल दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने तक सीमित नहीं होते। असली चुनौती युद्ध के बाद की स्थिति को संभालना होती है। किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता, विद्रोह और क्षेत्रीय संघर्ष लंबे समय तक जारी रह सकते हैं।
ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान में अमेरिका को कई रणनीतिक सवालों का सामना करना पड़ेगा। क्या सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमता वास्तव में खत्म की जा सकती है? क्या इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी या हिंसा और बढ़ेगी? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर युद्ध शुरू हुआ तो अमेरिका इससे बाहर कैसे निकलेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे खत्म करना बेहद कठिन होता है। यही वजह है कि कई सुरक्षा विश्लेषक अमेरिकी प्रशासन को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह खत्म करने से पहले हर विकल्प पर विचार करना जरूरी है।
दूसरी ओर, ईरान भी अमेरिका के दबाव के सामने झुकने के संकेत नहीं दे रहा है। ईरानी नेतृत्व लगातार कहता रहा है कि वह अपने हितों और संप्रभुता की रक्षा करेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी गलत अनुमान या छोटी सैन्य घटना से बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
वैश्विक समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है। अगर दोनों पक्ष बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाते हैं तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता दी गई तो दुनिया एक नए बड़े संघर्ष का सामना कर सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करेगा या फिर बातचीत का रास्ता चुनेगा। इतिहास गवाह है कि बड़े युद्ध अक्सर छोटे विवादों से शुरू होते हैं, लेकिन उनका अंत वर्षों बाद होता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान पर टिकी है। विशेषज्ञों की चेतावनी साफ है—अगर तनाव को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह संघर्ष अमेरिका को एक ऐसी जंग में खींच सकता है, जिसका अंत तय करना बेहद मुश्किल होगा।
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