'भीड़ बेकाबू थी, चेतावनी के बाद किया बल प्रयोग', संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा
संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि कई बार चेतावनी देने के बाद ही बल प्रयोग किया गया।
छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में अपना पक्ष रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई थी और प्रदर्शनकारी सुरक्षा बैरिकेड्स को पार कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए पहले कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन जब भीड़ नहीं रुकी तो मजबूरी में बल प्रयोग करना पड़ा।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित मार्ग और शर्तों का पालन नहीं किया गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बैरिकेड्स हटाने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया। संसद सत्र चल रहा था और संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। ऐसे में पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को रोकने और पीछे हटने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं होने पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
दिल्ली पुलिस का यह भी कहना है कि बल प्रयोग अंतिम विकल्प के तौर पर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कई पुलिसकर्मी भी इस दौरान घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। पुलिस ने दावा किया कि भीड़ को नियंत्रित किए बिना संसद क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल हो रहा था।
दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल छात्रों और विभिन्न संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मार्च शांतिपूर्ण था और बिना पर्याप्त कारण के लाठीचार्ज व आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। कई प्रदर्शनकारियों ने चोट लगने और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को संविधान द्वारा संरक्षित बताते हुए पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने की सहमति जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल प्रदर्शन होने भर से लाठीचार्ज उचित नहीं माना जा सकता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है।
रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस ने यह भी उल्लेख किया है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे लोगों की पहचान हुई है जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि ऐसे तत्वों की मौजूदगी ने भी स्थिति को और जटिल बनाया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है और मामले की जांच जारी है।
अब इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे की जांच पर टिकी है। अदालत के निर्देश, पुलिस की रिपोर्ट और प्रदर्शनकारियों के आरोप—इन सभी के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक फैसले सामने आ सकते हैं।
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