CM भूपेंद्र पटेल ने सोने की झाड़ू से की सड़क की सफाई, अहमदाबाद में भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होने से पहले पारंपरिक 'पाहिंद विधि' निभाते हुए सोने की झाड़ू से सड़क की सफाई की। यह सदियों पुरानी परंपरा विनम्रता, सेवा और समानता का प्रतीक मानी जाती है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हुई।

Jul 16, 2026 - 11:56
 0  5
CM भूपेंद्र पटेल ने सोने की झाड़ू से की सड़क की सफाई, अहमदाबाद में भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ

गुजरात की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली अहमदाबाद की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ शुरू हुई। यात्रा की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदियों पुरानी परंपरा 'पाहिंद विधि' का निर्वहन करते हुए भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे सोने की झाड़ू से सड़क की सफाई की। यह परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा और समानता का संदेश देने वाली ऐतिहासिक परंपरा मानी जाती है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग पर मौजूद रहे तथा 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

अहमदाबाद की जगन्नाथ रथ यात्रा देश की सबसे प्रमुख रथ यात्राओं में गिनी जाती है। ओडिशा के पुरी के बाद इसे सबसे महत्वपूर्ण जगन्नाथ यात्राओं में शामिल माना जाता है। हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस यात्रा के दौरान भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच पहुंचकर उन्हें दर्शन और आशीर्वाद देते हैं। जो श्रद्धालु मंदिर तक नहीं पहुंच पाते, उन्हें भी भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है।

रथ यात्रा शुरू होने से पहले होने वाली पाहिंद विधि का विशेष महत्व है। इस रस्म के तहत राज्य का प्रमुख प्रतिनिधि भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से सड़क की सफाई करता है। इस वर्ष मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह परंपरा निभाई। सोने की झाड़ू से मार्ग साफ करने का अर्थ यह है कि भगवान के सामने राजा हो या आम नागरिक, सभी समान हैं। सत्ता और पद का अहंकार छोड़कर भगवान की सेवा करना ही इस परंपरा का मूल संदेश है। यही कारण है कि इस रस्म को जगन्नाथ संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक माना जाता है।

इतिहासकारों के अनुसार, यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसकी शुरुआत ओडिशा के गजपति राजाओं द्वारा की गई थी। राजा स्वयं भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे झाड़ू लगाते थे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि भगवान के सामने कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। समय के साथ यह परंपरा विभिन्न राज्यों में भी अपनाई गई और आज अहमदाबाद में मुख्यमंत्री द्वारा पाहिंद विधि निभाना उसी ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है।

इस वर्ष की रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सजे-धजे रथों के साथ संत-महात्मा, अखाड़े, भजन मंडलियां, लोक कलाकार, सजे हुए हाथी, ऊंट और विभिन्न सांस्कृतिक झांकियां यात्रा का हिस्सा बने। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह भक्तों ने फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया और प्रसाद वितरण के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। हजारों पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल, ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी निगरानी, क्विक रिस्पॉन्स टीमें और मेडिकल इमरजेंसी सेवाएं पूरे मार्ग पर तैनात रहीं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील भी की।

धार्मिक दृष्टि से जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान के भक्तों तक स्वयं पहुंचने का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने मौसी घर की यात्रा पर निकलते हैं और अपने भक्तों का हाल-चाल जानने के लिए नगर भ्रमण करते हैं। यही कारण है कि इस यात्रा को भगवान और भक्त के बीच प्रेम, समर्पण और विश्वास का उत्सव भी कहा जाता है।

रथ यात्रा का सामाजिक महत्व भी कम नहीं है। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। यह यात्रा समाज में सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करने का अवसर भी बनती है।

आर्थिक दृष्टि से भी यह आयोजन अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण होता है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, मिठाई दुकानों, हस्तशिल्प व्यवसाय और छोटे व्यापारियों को अच्छा कारोबार मिलता है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचता है। इसके अलावा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर प्राप्त करते हैं।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को रथ यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं। उन्होंने इस पावन अवसर को सामाजिक एकता, भाईचारे और सेवा की भावना का प्रतीक बताया। कई अन्य राजनीतिक नेताओं और धार्मिक संगठनों ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और यात्रा के सफल आयोजन की कामना की।

जगन्नाथ रथ यात्रा सदियों से भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का प्रतीक रही है, जिसमें भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और समाज को समानता, सेवा और विनम्रता का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा सोने की झाड़ू से सड़क की सफाई उसी संदेश को दोहराती है कि चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा पद क्यों न रखता हो, ईश्वर के सामने सभी समान हैं। यही कारण है कि अहमदाबाद की रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का एक जीवंत उत्सव बन चुकी है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0