चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। भारत लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करता रहा है, क्योंकि यह कॉरिडोर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के उस हिस्से से होकर गुजरता है जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। बावजूद इसके चीन और पाकिस्तान लगातार इस परियोजना पर काम आगे बढ़ाते रहे।
अब हालिया घटनाओं और सुरक्षा विवादों के बाद CPEC फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के मुताबिक परियोजना से जुड़े कुछ इलाकों में सुरक्षा हालात बिगड़ने और स्थानीय विरोध बढ़ने से चीन की चिंता भी बढ़ी है।
CPEC चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative (BRI) का अहम हिस्सा माना जाता है। इस परियोजना के जरिए चीन अपने शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ना चाहता है। करीब 60 अरब डॉलर से ज्यादा की लागत वाली इस परियोजना में सड़क, रेलवे, ऊर्जा और बंदरगाह से जुड़े बड़े निर्माण शामिल हैं।
भारत ने शुरुआत से ही साफ किया था कि PoK से गुजरने वाली किसी भी परियोजना को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है। विदेश मंत्रालय कई बार आधिकारिक बयान जारी कर इस पर आपत्ति दर्ज करा चुका है। भारत का कहना है कि विवादित क्षेत्र में किसी तीसरे देश का निवेश अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
हाल ही में CPEC से जुड़े इलाकों में सुरक्षा खतरे बढ़ने की खबरों ने पाकिस्तान सरकार की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जगहों पर स्थानीय संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं, जबकि कुछ घटनाओं में चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बाद पाकिस्तान ने चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि CPEC अब सिर्फ आर्थिक परियोजना नहीं रह गई, बल्कि यह चीन-पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी का बड़ा प्रतीक बन चुकी है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
रणनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार, अगर CPEC पूरी तरह सफल होता है तो इससे चीन को हिंद महासागर तक सीधी पहुंच मिल सकती है, जो भारत के लिए सामरिक चुनौती मानी जाती है। यही वजह है कि भारत इस परियोजना को केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी देखता है।
इस बीच चीन लगातार दावा करता रहा है कि CPEC केवल विकास और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई परियोजना है और इसका किसी तीसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हालांकि भारत इस दलील से सहमत नहीं दिखता।
फिलहाल CPEC को लेकर बढ़ता विवाद एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को चर्चा में ले आया है। आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान संबंधों में और तनाव बढ़ा सकता है।