केमिस्ट्स की हड़ताल का दिखने लगा असर! दिल्ली, लखनऊ, राजकोट और चंडीगढ़ में दवा संकट की आशंका
देशभर में केमिस्ट्स की हड़ताल का असर कई शहरों में दिखाई देने लगा है। दिल्ली, लखनऊ, राजकोट और चंडीगढ़ में कई मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे मरीजों और आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
देशभर में केमिस्ट्स और दवा विक्रेताओं की हड़ताल का असर अब साफ तौर पर नजर आने लगा है। दिल्ली, लखनऊ, राजकोट और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयां खरीदने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह हड़ताल ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ विरोध के रूप में की जा रही है।
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर देशभर के लाखों केमिस्ट्स इस बंद में शामिल हुए हैं। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना उचित जांच और नियमों के दवाइयां बेच रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। केमिस्ट्स का कहना है कि बिना फिजिकल प्रिस्क्रिप्शन वेरिफिकेशन के दवाओं की बिक्री एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल और नकली प्रिस्क्रिप्शन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है।
दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में स्थानीय मेडिकल स्टोर बंद रहने से लोगों को जरूरी दवाइयों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी। वहीं लखनऊ और राजकोट में भी कई जगहों पर मरीजों और उनके परिवारों ने दवा उपलब्ध न होने की शिकायत की। चंडीगढ़ में केमिस्ट एसोसिएशन ने पहले ही बंद का ऐलान कर दिया था, जिसके चलते कई दवा दुकानें पूरे दिन बंद रहीं।
हालांकि, सरकार और कुछ फार्मेसी संगठनों की ओर से कहा गया है कि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो। इसके बावजूद आम लोगों में दवाइयों की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
इस हड़ताल ने एक बार फिर ऑनलाइन फार्मेसी और पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स के बीच बढ़ते विवाद को सामने ला दिया है। अब सबकी नजर सरकार और संबंधित विभागों पर है कि वे इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और मरीजों की सुविधा के साथ व्यापारिक हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।
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