कौन हैं 33 साल के सारांश जैन? टीम इंडिया में मिली सरप्राइज एंट्री, संघर्ष की कहानी कर देगी भावुक

मध्य प्रदेश के 33 वर्षीय ऑलराउंडर सारांश जैन को श्रीलंका दौरे के लिए पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। घरेलू क्रिकेट में वर्षों की मेहनत, परिवार के त्याग और लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें यह बड़ा मौका मिला है।

Jul 28, 2026 - 15:07
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कौन हैं 33 साल के सारांश जैन? टीम इंडिया में मिली सरप्राइज एंट्री, संघर्ष की कहानी कर देगी भावुक

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया की टेस्ट टीम का ऐलान किया तो सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हुई, वह था 33 वर्षीय सारांश जैन। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह नाम भले ही नया हो, लेकिन घरेलू क्रिकेट को करीब से देखने वालों के लिए यह चयन लंबे संघर्ष, धैर्य और लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के इस अनुभवी ऑलराउंडर को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। उनका चयन तब हुआ जब वॉशिंगटन सुंदर चोट के कारण पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं रहे।

सारांश जैन का क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। ऐसे दौर में जब कई खिलाड़ी 20 से 25 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण कर लेते हैं, सारांश ने 33 वर्ष की उम्र में टीम इंडिया का दरवाजा खटखटाया। यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने करीब एक दशक से भी अधिक समय तक घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत की, लेकिन राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर सीजन में अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने की कोशिश जारी रखी।

मध्य प्रदेश के इंदौर से ताल्लुक रखने वाले सारांश जैन दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज और उपयोगी बल्लेबाज हैं। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने कई बार अपनी टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला है। पिछले तीन रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने 22 मैचों में 78 विकेट लेकर खुद को देश के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल किया। गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में अहम रन बनाने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में पहचान दिलाई।

हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई इंडिया-ए टीम के लिए भी सारांश का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने गेंद से लगातार विकेट लिए और एक मुकाबले में नाबाद 70 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं को काफी प्रभावित कर गया। माना जा रहा है कि यही प्रदर्शन उनके टीम इंडिया में चयन का सबसे बड़ा कारण बना।

सारांश जैन की सफलता के पीछे उनके परिवार का त्याग भी कम नहीं रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब उनके पिता कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, तब उन्होंने अपनी बीमारी की पूरी जानकारी बेटे से छिपाए रखी ताकि सारांश का ध्यान क्रिकेट से न भटके। पिता चाहते थे कि बेटा अपने सपने पर पूरा ध्यान लगाए और मानसिक रूप से कमजोर न पड़े। दूसरी ओर, उनके भाई ने भी परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए अपने क्रिकेट करियर से समझौता किया, ताकि सारांश अपने खेल पर पूरी तरह फोकस कर सकें। यही वजह है कि टीम इंडिया में चयन की खबर पूरे परिवार के लिए भावुक कर देने वाला पल बन गई।

घरेलू क्रिकेट में सारांश का रिकॉर्ड उनकी मेहनत की कहानी खुद बयां करता है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में भी अपनी छाप छोड़ी और कई बार मैच जिताऊ प्रदर्शन किए। इसके अलावा उन्हें लाला अमरनाथ पुरस्कार और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के लिए कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। चयनकर्ताओं का मानना है कि ऐसे खिलाड़ी को लंबे समय तक नजरअंदाज करना संभव नहीं था।

श्रीलंका का दौरा स्पिन गेंदबाजों के लिए हमेशा चुनौती और अवसर दोनों लेकर आता है। वहां की पिचें अक्सर स्पिनरों की मदद करती हैं। ऐसे में टीम इंडिया को एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी, जो गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी योगदान दे सके। सारांश जैन इसी भूमिका में फिट बैठते हैं। उनकी ऑफ स्पिन, धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी और घरेलू क्रिकेट का अनुभव उन्हें टीम के लिए उपयोगी विकल्प बनाता है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि सारांश का चयन भारतीय घरेलू क्रिकेट खेलने वाले हजारों खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है। यह संदेश देता है कि यदि खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहे तो उम्र कभी भी सबसे बड़ी बाधा नहीं बनती। भारतीय क्रिकेट में पहले भी कई खिलाड़ियों ने 30 साल की उम्र के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है और सारांश अब उसी सूची में शामिल हो गए हैं।

बीसीसीआई द्वारा घोषित श्रीलंका दौरे की टेस्ट टीम में शुभमन गिल कप्तान होंगे, जबकि केएल राहुल उपकप्तान की भूमिका निभाएंगे। टीम में यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ सारांश जैन को भी पहली बार मौका मिला है। हालांकि वाशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए चयनकर्ताओं ने सारांश पर भरोसा जताया है।

अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि क्या सारांश जैन को श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का मौका मिलता है। यदि उन्हें अंतिम एकादश में जगह मिलती है, तो यह उनके लिए वर्षों की मेहनत का सबसे बड़ा पुरस्कार होगा। घरेलू क्रिकेट से लेकर इंडिया-ए और अब टीम इंडिया तक का उनका सफर यह साबित करता है कि लगातार मेहनत, धैर्य और खुद पर भरोसा किसी भी खिलाड़ी को उसके सपनों तक पहुंचा सकता है।

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