US-Iran War Live: अमेरिका ने ईरान के 90 सैन्य ठिकानों पर बरसाए बम, IRGC की रक्षा व्यवस्था को बड़ा झटका
अमेरिका ने ईरान में कथित तौर पर 90 सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई रक्षा प्रतिष्ठानों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया। हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है और जवाबी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कथित तौर पर 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी रक्षा सूत्रों के अनुसार इन हमलों का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसके रणनीतिक रक्षा नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचाना था।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी एयर फोर्स और नौसेना ने अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट, लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों और प्रिसिजन गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल करते हुए कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इन लक्ष्यों में मिसाइल लॉन्चिंग बेस, ड्रोन ऑपरेशन सेंटर, हथियार भंडार, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और सैन्य संचार नेटवर्क शामिल बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य केवल सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था। उनका कहना है कि आम नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए हाई-प्रिसिजन हथियारों का उपयोग किया गया। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरानी सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है और चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई का उचित समय पर करारा जवाब दिया जाएगा। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि देश की रक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए सेना तैयार है।
सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी हमलों में IRGC के कई रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। इनमें मिसाइल उत्पादन इकाइयों, भूमिगत हथियार भंडार, एयर डिफेंस रडार स्टेशन और कमांड सेंटर शामिल हो सकते हैं। यदि इन दावों की पुष्टि होती है तो यह हाल के वर्षों में IRGC के खिलाफ सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जाएगा।
इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा मजबूत कर दी गई है, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिक बेड़ों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान सीधे जवाबी हमला करता है तो यह संघर्ष केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेष रूप से इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और फारस की खाड़ी में सक्रिय ईरान समर्थित समूह भी इस संघर्ष का हिस्सा बन सकते हैं।
ऊर्जा बाजार पर भी इस घटनाक्रम का असर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास किसी भी प्रकार का सैन्य संकट दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। कई देशों और वैश्विक संगठनों ने तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द कूटनीतिक रास्ता नहीं अपनाते तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा एक साथ इतने बड़े पैमाने पर किए गए हमले यह संकेत देते हैं कि उसका लक्ष्य केवल सीमित जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि ईरान की सैन्य क्षमताओं पर व्यापक दबाव बनाना भी हो सकता है। वहीं ईरान के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है और ऐसे में उसकी प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
IRGC लंबे समय से ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य इकाइयों में से एक माना जाता है। देश के मिसाइल कार्यक्रम, ड्रोन नेटवर्क और क्षेत्रीय सैन्य रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि इसके प्रमुख ठिकानों को वास्तव में भारी नुकसान पहुंचा है तो इसका प्रभाव केवल ईरान की सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति बदल सकती है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से आधिकारिक सूचनाएं लगातार सामने आ रही हैं और घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं और क्षेत्र में अतिरिक्त बलों की तैनाती की खबरें भी सामने आ रही हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान अगला कदम क्या उठाता है और क्या यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता है या फिर कूटनीतिक प्रयास हालात को संभालने में सफल होते हैं।
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