300 साल में बना, लाखों लोगों की मेहनत से तैयार हुआ... यूक्रेन ने कैसे बंद कर दिया रूस का 'होर्मुज'? पुतिन को लगा बड़ा झटका

रूस के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली वोल्गा–डॉन नहर पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने बड़ा असर डाला है। 300 साल पुराने इस रणनीतिक जलमार्ग के बंद होने से रूस के व्यापार, सैन्य आपूर्ति और ऊर्जा परिवहन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जानिए क्यों इसे रूस का 'होर्मुज' कहा जा रहा है।

Jul 16, 2026 - 10:40
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300 साल में बना, लाखों लोगों की मेहनत से तैयार हुआ... यूक्रेन ने कैसे बंद कर दिया रूस का 'होर्मुज'? पुतिन को लगा बड़ा झटका

300 साल में बना, लाखों लोगों की मेहनत से तैयार हुआ... यूक्रेन ने कैसे बंद कर दिया रूस का 'होर्मुज'? पुतिन को लगा बड़ा झटका

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब केवल जमीन, आसमान या समुद्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे की रणनीतिक सप्लाई लाइनों और आर्थिक ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। इसी कड़ी में यूक्रेन ने रूस के लिए बेहद अहम माने जाने वाले वोल्गा–डॉन जलमार्ग (Volga–Don Waterway) को प्रभावित करने का दावा किया है। इस जलमार्ग के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर हुए ड्रोन हमलों के बाद जहाजों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी, जिससे रूस की लॉजिस्टिक्स, व्यापार और सैन्य आपूर्ति पर असर पड़ा। यही वजह है कि इस नहर को कई विशेषज्ञ रूस का 'होर्मुज' कह रहे हैं, क्योंकि जिस तरह दुनिया के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य ऊर्जा आपूर्ति की महत्वपूर्ण कड़ी है, उसी तरह यह जलमार्ग रूस के आंतरिक समुद्री परिवहन और रणनीतिक नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है।

वोल्गा–डॉन जलमार्ग का विचार रूस में कई शताब्दियों पहले सामने आया था। इतिहासकारों के अनुसार, रूस के शासक पीटर द ग्रेट ने 18वीं सदी की शुरुआत में वोल्गा और डॉन नदियों को जोड़ने की कल्पना की थी ताकि देश के भीतर जल परिवहन को मजबूत बनाया जा सके। हालांकि उस समय तकनीकी और आर्थिक सीमाओं के कारण यह सपना साकार नहीं हो सका। बाद में सोवियत संघ के दौर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति मिली और 1948 में इसका निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर शुरू हुआ। लगभग चार वर्षों की कठिन मेहनत के बाद 1952 में यह नहर पूरी हुई। इसके निर्माण में लाखों मजदूरों और युद्धबंदियों ने काम किया। कठिन परिस्थितियों में हुए इस निर्माण को सोवियत इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है, हालांकि इतिहासकार यह भी बताते हैं कि इस परियोजना में जबरन श्रम और कैदियों का व्यापक उपयोग किया गया था।

करीब 101 किलोमीटर लंबी यह नहर रूस की दो सबसे महत्वपूर्ण नदियों—वोल्गा और डॉन—को जोड़ती है। इसके जरिए कैस्पियन सागर, आज़ोव सागर, काला सागर, बाल्टिक सागर और व्हाइट सी के बीच जलमार्ग संपर्क स्थापित होता है। यही कारण है कि यह नहर रूस के लिए केवल एक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक और सैन्य गलियारा है। तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, अनाज, कोयला, इस्पात, मशीनरी और भारी औद्योगिक सामान बड़ी मात्रा में इसी मार्ग से भेजे जाते हैं। इसके अलावा रूस की नौसेना भी आवश्यकता पड़ने पर अपने कुछ जहाजों को इस नेटवर्क के जरिए विभिन्न समुद्री क्षेत्रों तक पहुंचा सकती है, जिससे इसकी सामरिक अहमियत और बढ़ जाती है।

हाल के दिनों में यूक्रेन ने इस जलमार्ग से जुड़े बुनियादी ढांचे पर ड्रोन हमले किए। इन हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए जहाजों की आवाजाही रोक दी गई और संबंधित क्षेत्रों में निरीक्षण तथा मरम्मत का कार्य शुरू किया गया। हालांकि रूस ने नुकसान को सीमित बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हमले लगातार होते रहे तो इससे रूस की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। जलमार्ग के बाधित होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और कुछ सैन्य लॉजिस्टिक्स भी प्रभावित हो सकते हैं। युद्ध के दौरान किसी भी देश के लिए उसकी परिवहन व्यवस्था का बाधित होना रणनीतिक चुनौती माना जाता है।

इस जलमार्ग की तुलना होर्मुज जलडमरूमध्य से इसलिए की जा रही है क्योंकि दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग हैं। हालांकि दोनों की प्रकृति अलग है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। वहीं वोल्गा–डॉन नहर मुख्य रूप से रूस का आंतरिक जलमार्ग है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक आपूर्ति और सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिए इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी प्रकार की रुकावट का असर रूस के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि "रूस का होर्मुज" एक प्रतीकात्मक उपमा है, जो इस जलमार्ग की रणनीतिक अहमियत को समझाने के लिए दी जाती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह भी दिखाया है कि आधुनिक संघर्षों में केवल मोर्चे पर लड़ाई ही निर्णायक नहीं होती, बल्कि बुनियादी ढांचे, ऊर्जा नेटवर्क, रेलवे, बंदरगाह, पुल और जलमार्ग भी महत्वपूर्ण लक्ष्य बन जाते हैं। यूक्रेन पिछले कुछ समय से रूस के भीतर मौजूद तेल डिपो, सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और परिवहन नेटवर्क पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले कर रहा है। इसका उद्देश्य रूस की सैन्य क्षमता और लॉजिस्टिक्स पर दबाव बनाना है। दूसरी ओर रूस भी यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे, रेल नेटवर्क और सैन्य प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले करता रहा है। दोनों देशों के बीच यह रणनीतिक लड़ाई अब बुनियादी ढांचे को केंद्र में रखकर भी लड़ी जा रही है।

हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि वोल्गा–डॉन जलमार्ग लंबे समय के लिए पूरी तरह बंद हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ हिस्सों में सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से आवाजाही रोकी गई थी और संबंधित एजेंसियां स्थिति सामान्य करने में जुटी हैं। अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि मरम्मत कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और भविष्य में ऐसे हमले दोबारा होते हैं या नहीं। फिर भी इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में आर्थिक और परिवहन नेटवर्क भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि पारंपरिक सैन्य ठिकाने। यदि रणनीतिक जलमार्ग बार-बार बाधित होते हैं तो उसका असर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, रक्षा तैयारियों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। यही कारण है कि वोल्गा–डॉन नहर पर हुए हमले को रूस के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, भले ही इसकी वास्तविक दीर्घकालिक क्षति का आकलन अभी बाकी हो।

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