क्या भारत में आने वाले हैं प्लास्टिक के नोट? RBI की बड़ी तैयारी से तेज हुई चर्चा
भारत में जल्द पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट चलन में आ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि ये नोट कागजी नोटों से ज्यादा टिकाऊ, सुरक्षित और कम लागत वाले होंगे।
भारत में एक बार फिर करेंसी सिस्टम में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। खबरें सामने आ रही हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI अब देश में पॉलीमर या प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी कर रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई है और केंद्रीय बैंक अब इस दिशा में आगे बढ़ने पर विचार कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पटना और मुंबई में आयोजित RBI की पिछली दो महत्वपूर्ण बैठकों में प्लास्टिक आधारित नोटों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि इन बैठकों में पॉलीमर नोटों के फायदे, उनकी लागत, सुरक्षा और लंबे समय तक टिकाऊ रहने जैसे पहलुओं पर विचार किया गया। इसी वजह से अब माना जा रहा है कि भारत में जल्द ही इन नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।
📌 आखिर क्या होते हैं पॉलीमर या प्लास्टिक नोट?
पॉलीमर नोट एक खास तरह के प्लास्टिक मैटेरियल से बनाए जाते हैं, जिन्हें “polymer substrate” कहा जाता है। ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और लचीले होते हैं। दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन में पहले से ही ऐसे नोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
इन नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि ये जल्दी फटते नहीं हैं, पानी से खराब नहीं होते और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। यही वजह है कि कई देश धीरे-धीरे कागजी नोटों से पॉलीमर नोटों की ओर बढ़ रहे हैं।
📌 कागजी नोटों से बेहतर क्यों माने जा रहे हैं ये नोट?
रिपोर्ट में बताया गया है कि पॉलीमर नोटों की उम्र कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। जहां सामान्य नोट जल्दी घिस जाते हैं, वहीं प्लास्टिक नोट लंबे समय तक बिना खराब हुए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
इसके अलावा इन नोटों को नकली बनाना भी काफी मुश्किल माना जाता है। इनमें एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जैसे पारदर्शी विंडो, विशेष इंक और माइक्रो डिजाइन जोड़े जा सकते हैं, जिससे फेक करेंसी पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
एक बड़ा फायदा यह भी बताया जा रहा है कि लंबे समय में इनकी प्रिंटिंग लागत कम पड़ सकती है। शुरुआत में इनकी लागत ज्यादा हो सकती है, लेकिन क्योंकि ये ज्यादा समय तक चलते हैं, इसलिए बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम होगी।
🏧 ATM और बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्ट्स के अनुसार RBI के पास पहले से ऐसे संसाधन मौजूद हैं, जिनसे ATM मशीनों और बैंकिंग सिस्टम को पॉलीमर नोटों के अनुकूल बनाया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि मौजूदा ATM मशीनें भी थोड़े बदलाव के बाद इन नोटों को आसानी से जारी कर सकेंगी।
हालांकि शुरुआत में कुछ तकनीकी बदलाव और टेस्टिंग की जरूरत पड़ सकती है। इसी कारण RBI पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए यह देखना चाहता है कि भारतीय परिस्थितियों में ये नोट कितने प्रभावी साबित होते हैं।
📌 क्या भारत में पहले भी हुई थी ऐसी कोशिश?
यह पहली बार नहीं है जब भारत में प्लास्टिक नोटों की चर्चा हो रही हो। इससे पहले भी RBI ने कुछ साल पहले पॉलीमर नोटों को लेकर परीक्षण की योजना बनाई थी। उस समय छोटे मूल्य वर्ग के नोटों पर ट्रायल की बात हुई थी, लेकिन बाद में वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने और नकली नोटों पर नियंत्रण की जरूरत को देखते हुए RBI एक बार फिर इस दिशा में सक्रिय होता दिखाई दे रहा है।
🌍 दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश था जिसने पॉलीमर नोटों को बड़े स्तर पर अपनाया था। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, रोमानिया और सिंगापुर जैसे कई देशों ने भी प्लास्टिक नोट जारी किए।
इन देशों का अनुभव काफी सकारात्मक रहा है। वहां पाया गया कि प्लास्टिक नोट ज्यादा साफ रहते हैं, जल्दी खराब नहीं होते और नकली नोटों की घटनाएं भी कम हुई हैं।
📌 क्या पूरी तरह बंद हो जाएंगे कागजी नोट?
फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि भारत पूरी तरह कागजी नोटों को बंद कर देगा। माना जा रहा है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो धीरे-धीरे कुछ मूल्य वर्गों में पॉलीमर नोट लाए जा सकते हैं।
RBI संभवतः शुरुआत छोटे नोटों से कर सकता है, क्योंकि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब भी हो जाते हैं।
📌 निष्कर्ष
भारत में पॉलीमर या प्लास्टिक नोटों को लेकर चर्चा अब तेजी पकड़ चुकी है। RBI इस विकल्प को गंभीरता से देख रहा है क्योंकि ये नोट ज्यादा सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय में सस्ते साबित हो सकते हैं। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो आने वाले वर्षों में भारतीय करेंसी का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।
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