नया नियम! ऑनलाइन फ्रॉड में गंवाए पैसे? RBI देगा ₹25,000 तक का मुआवजा!

अगर आप ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो गए हैं, तो अब राहत मिल सकती है। ₹25,000 तक के मुआवजे से जुड़ी नई जानकारी जानिए और समझिए कि किन मामलों में यह लागू हो सकती है।

Jun 26, 2026 - 11:12
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नया नियम! ऑनलाइन फ्रॉड में गंवाए पैसे? RBI देगा ₹25,000 तक का मुआवजा!

भारत में डिजिटल पेमेंट का चलन पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है। आज अधिकांश लोग UPI, नेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के जरिए रोजमर्रा के भुगतान करते हैं। जहां डिजिटल लेनदेन ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं इसके साथ ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, नकली ऐप, QR कोड स्कैम, OTP शेयरिंग और स्क्रीन शेयरिंग जैसे कई तरीकों से साइबर अपराधी लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ा रहे हैं।

इसी बीच सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि "अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) उसे ₹25,000 तक का मुआवजा देगा।" इस दावे ने लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में RBI ने ऐसा कोई नया नियम लागू किया है? क्या हर ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने वाले व्यक्ति को सीधे ₹25,000 मिलेंगे? इन सवालों का जवाब जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि अधूरी या गलत जानकारी लोगों को भ्रमित कर सकती है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि RBI सीधे किसी व्यक्ति को मुआवजा नहीं देता। भारतीय रिजर्व बैंक देश की बैंकिंग प्रणाली का नियामक (Regulator) है, जो बैंकों, भुगतान प्रणाली और वित्तीय संस्थानों के लिए नियम और दिशानिर्देश तय करता है। जब किसी ग्राहक के खाते से उसकी अनुमति के बिना कोई डिजिटल ट्रांजैक्शन हो जाता है, तो ऐसे मामलों में RBI ने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बनाए हैं। इन नियमों के तहत ग्राहक की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि गलती किसकी थी और ग्राहक ने घटना की सूचना कितनी जल्दी बैंक को दी।

यदि किसी अनधिकृत ट्रांजैक्शन में ग्राहक की कोई गलती नहीं है और बैंक या भुगतान प्रणाली की लापरवाही सामने आती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य (Zero Liability) हो सकती है। इसका मतलब है कि ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई बैंक द्वारा की जा सकती है। वहीं, अगर ग्राहक ने फ्रॉड की जानकारी मिलने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर बैंक को शिकायत दर्ज करा दी है, तो उसकी वित्तीय जिम्मेदारी सीमित (Limited Liability) हो सकती है। हालांकि, यह राशि हर मामले में एक जैसी नहीं होती और न ही ₹25,000 का कोई सार्वभौमिक मुआवजा तय है।

यही कारण है कि "RBI हर ऑनलाइन फ्रॉड पर ₹25,000 देगा" जैसा दावा पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। किसी भी ग्राहक को मिलने वाली राहत इस बात पर निर्भर करती है कि फ्रॉड कैसे हुआ, बैंक की जांच में क्या तथ्य सामने आए, ग्राहक ने नियमों का पालन किया या नहीं और संबंधित बैंक की नीति क्या कहती है। इसलिए वायरल दावों पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए।

अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हो जाता है, तो सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि तुरंत अपने बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करें और संबंधित कार्ड, UPI या खाते को ब्लॉक कराएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। सरकार का National Cyber Crime Reporting Portal (cybercrime.gov.in) भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज की जाती है, उतनी ही अधिक संभावना रहती है कि लेनदेन को रोका जा सके या राशि रिकवर की जा सके। कई मामलों में शुरुआती कुछ घंटों के भीतर कार्रवाई होने पर बैंक और संबंधित एजेंसियां पैसे को फ्रीज कराने में सफल भी होती हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए, किसी के साथ OTP, CVV, ATM PIN, UPI PIN या नेट बैंकिंग पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। बैंक, RBI या कोई सरकारी एजेंसी कभी भी फोन कॉल, SMS या ईमेल के जरिए ग्राहकों से ऐसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगती। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और कॉल काट दें।

इसके अलावा QR कोड स्कैम से भी सावधान रहने की जरूरत है। याद रखें कि QR कोड स्कैन करने से पैसे प्राप्त नहीं होते, बल्कि अधिकतर मामलों में भुगतान किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति पैसे भेजने के नाम पर QR कोड स्कैन करने के लिए कहता है, तो यह धोखाधड़ी हो सकती है। इसी तरह स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड कराने वाले कॉल से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे साइबर अपराधी आपके फोन और बैंकिंग ऐप तक पहुंच बना सकते हैं।

डिजिटल भुगतान का उपयोग करते समय मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा अपडेट रखें, मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें, दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication) चालू रखें और अपने बैंक खाते के SMS व ईमेल अलर्ट हमेशा सक्रिय रखें। इससे किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी तुरंत मिल जाती है और समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।

कुल मिलाकर, ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े मामलों में RBI ने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जरूर बनाए हैं, लेकिन हर पीड़ित को स्वतः ₹25,000 का मुआवजा मिलने का कोई नया सार्वभौमिक नियम लागू नहीं हुआ है। इसलिए यदि आपको ऐसी कोई जानकारी सोशल मीडिया पर दिखाई दे, तो पहले उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें। ऑनलाइन फ्रॉड होने की स्थिति में सबसे जरूरी है कि बिना देर किए बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। सही समय पर उठाया गया कदम आपके पैसे बचाने और नुकसान कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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