'पिछले 5 साल रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक रहे', पश्चिमी देशों पर बरसे पुतिन, दिया बड़ा बयान

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पिछले पांच साल रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक रहे, लेकिन इन चुनौतियों ने देश को और मजबूत बनाया। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी देशों पर रूस को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।

Jul 28, 2026 - 15:16
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'पिछले 5 साल रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक रहे', पश्चिमी देशों पर बरसे पुतिन, दिया बड़ा बयान

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बीते पांच साल रूस के लिए बेहद कठिन और निर्णायक रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौर में रूस को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इन चुनौतियों ने देश को कमजोर करने के बजाय और अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर तथा संगठित बनाया। पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।

अपने संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस ने पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय अलगाव की कोशिशों के बावजूद अपने विकास की रफ्तार बनाए रखी। उन्होंने दावा किया कि बाहरी दबावों ने रूस को आत्मनिर्भर बनने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और नई तकनीकों के विकास की दिशा में तेजी से काम करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, कठिन परिस्थितियों ने देश को कई महत्वपूर्ण सबक भी सिखाए हैं।

पुतिन ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने रूस को आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए लगातार प्रतिबंधों और दबाव की नीति अपनाई। उनका कहना था कि इन प्रयासों के बावजूद रूस ने अपनी अर्थव्यवस्था, रक्षा क्षमता और औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि रूस अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आगे भी इसी तरह काम करता रहेगा और बाहरी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।

रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद काफी बढ़ गया। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य सहयोगी देशों ने रूस पर कई चरणों में आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों का असर रूस के बैंकिंग सेक्टर, ऊर्जा उद्योग, रक्षा क्षेत्र और कई बड़े उद्योगों पर पड़ा। इसके जवाब में रूस ने भी अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों में बदलाव किए तथा एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।

अपने भाषण में पुतिन ने यह भी कहा कि रूस की जनता ने कठिन समय में एकजुटता दिखाई और यही देश की सबसे बड़ी ताकत रही। उनके अनुसार, राष्ट्रीय एकता और नागरिकों का समर्थन ही वह आधार है, जिसकी वजह से रूस विभिन्न चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रहा है। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकारी संस्थानों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि संकट के दौर में सभी ने मिलकर देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन के इस बयान का उद्देश्य घरेलू राजनीतिक संदेश देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाना भी है कि रूस प्रतिबंधों और बाहरी दबावों के बावजूद अपनी नीतियों पर कायम है। हाल के महीनों में रूस बार-बार यह दावा करता रहा है कि पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीति अपने घोषित उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सकी है, जबकि पश्चिमी देशों का कहना है कि इन प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध क्षमता पर असर डाला है।

यूक्रेन युद्ध अब भी रूस और पश्चिमी देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। रूस का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई उसके सुरक्षा हितों से जुड़ी है, जबकि यूक्रेन और उसके सहयोगी देश इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हैं। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक टकराव और आर्थिक प्रतिबंधों का सिलसिला जारी है।

रूस ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा निर्यात, रक्षा उत्पादन और वैकल्पिक व्यापारिक साझेदारों पर विशेष ध्यान दिया है। चीन, भारत और कई अन्य एशियाई देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी उसने प्रयास तेज किए हैं। पुतिन का कहना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में रूस नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल रहा है और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है।

पुतिन ने अपने संबोधन में यह संकेत भी दिया कि रूस आने वाले समय में अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसलों पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, आर्थिक विकास और संप्रभुता सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि रूस वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत करने के लिए प्रयास जारी रखेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस के सामने एक ओर पश्चिमी प्रतिबंधों का दबाव है, तो दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। ऐसे में पुतिन का यह संदेश घरेलू राजनीति और वैश्विक रणनीति—दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में रूस और पश्चिमी देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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