1600 करोड़ के कथित कोयला घोटाले पर बवाल, केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने CM रेवंत रेड्डी से मांगी उच्चस्तरीय जांच

तेलंगाना में सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के स्टॉक से कथित तौर पर 40 लाख टन कोयला गायब होने के आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। कथित तौर पर गायब कोयले की कीमत करीब 1600 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

Jun 17, 2026 - 10:43
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1600 करोड़ के कथित कोयला घोटाले पर बवाल, केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने CM रेवंत रेड्डी से मांगी उच्चस्तरीय जांच

तेलंगाना में सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) से जुड़े कथित 1600 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को पत्र लिखा है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब रिपोर्टों में दावा किया गया कि SCCL के स्टॉक से लगभग 40 लाख टन कोयला गायब है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1600 करोड़ रुपये है।

10 जून को लिखे गए अपने पत्र में किशन रेड्डी ने इस मुद्दे को राज्य की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में कोयला स्टॉक से गायब हुआ है, तो यह न केवल वित्तीय नुकसान का मामला है बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि SCCL तेलंगाना की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में से एक है, जिसका राज्य की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में कंपनी के कोयला भंडार में किसी भी प्रकार की अनियमितता को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच आवश्यक है।

बताया जा रहा है कि कोयले के स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता के बीच बड़े अंतर को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने घोटाले की पुष्टि नहीं की है।

किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय समिति से कराई जाए ताकि तथ्य सामने आ सकें। उन्होंने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं तो सरकार को स्पष्ट रूप से स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इस बीच, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

SCCL देश की प्रमुख कोयला उत्पादन कंपनियों में से एक है और तेलंगाना सरकार तथा केंद्र सरकार की संयुक्त हिस्सेदारी वाली संस्था है। कंपनी का कोयला उत्पादन दक्षिण भारत के कई राज्यों की बिजली उत्पादन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में कंपनी से जुड़ी किसी भी अनियमितता का असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला स्टॉक के आंकड़ों में अंतर कई कारणों से हो सकता है। इसमें रिकॉर्ड प्रबंधन की त्रुटियां, माप प्रणाली में अंतर, परिवहन से जुड़ी विसंगतियां या अन्य तकनीकी कारण शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यदि अंतर वास्तव में 40 लाख टन के आसपास है, तो इसकी गहन जांच आवश्यक हो जाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में तेलंगाना की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। राज्य में पहले से ही विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज है और ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी से जुड़ा यह मामला सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।

केंद्रीय मंत्री के पत्र के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि सरकार जांच का आदेश देती है तो आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं यदि सरकार आरोपों को खारिज करती है, तो विपक्ष इस मुद्दे को और अधिक आक्रामक तरीके से उठा सकता है।

जनता के बीच भी इस मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी कंपनियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह अपेक्षा की जा रही है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्द ही स्थिति स्पष्ट करेंगी।

फिलहाल, 1600 करोड़ रुपये के कथित कोयला घोटाले का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच की मांग के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में SCCL के स्टॉक से इतनी बड़ी मात्रा में कोयला गायब हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा और जांच प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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