'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं', पीएम मोदी के ऐलान के बावजूद विपक्ष अपने रुख पर अड़ा

पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बावजूद विपक्ष और प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही उनकी पहली और सबसे अहम मांग है।

Jul 23, 2026 - 12:00
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'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं', पीएम मोदी के ऐलान के बावजूद विपक्ष अपने रुख पर अड़ा

'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी नहीं...', पीएम मोदी के ऐलान के बावजूद विपक्ष अपने स्टैंड पर कायम

पेपर लीक मामलों पर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई कर दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद विपक्ष और छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

कांग्रेस, इंडिया गठबंधन के अन्य दलों और आंदोलन का समर्थन कर रहे कई नेताओं का आरोप है कि केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होना भी उतना ही जरूरी है। विपक्ष का दावा है कि जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक सरकार की जवाबदेही तय नहीं मानी जा सकती।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों का भरोसा बार-बार टूट रहा है और केवल नई घोषणाएं करने के बजाय जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप करने और शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग दोहराई है।

वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदर्शनकारी संगठनों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और केवल न्यायिक प्रक्रिया तेज करने से पहले राजनीतिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

सरकार का पक्ष है कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट व्यवस्था के जरिए पेपर लीक मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और दोषियों को जल्द सजा मिलेगी। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई प्रशासनिक कदम भी उठाए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य छात्रों का विश्वास बहाल करना और परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।

हालांकि विपक्ष का तर्क है कि यह कदम स्वागत योग्य हो सकता है, लेकिन इससे सरकार की जवाबदेही समाप्त नहीं होती। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं हुई हैं तो संबंधित मंत्रालय की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी कारण विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है।

इस मुद्दे को लेकर संसद में भी लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रधानमंत्री के विस्तृत बयान की मांग पर अड़ा हुआ है। इससे संसद की कार्यवाही भी प्रभावित हो रही है और दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है।

दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर छात्रों और विभिन्न संगठनों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ा है। हाल के दिनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों ने इस आंदोलन को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अब केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के विश्वास से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत, संसद की कार्यवाही और प्रदर्शनकारी संगठनों की अगली रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी। फिलहाल इतना साफ है कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद विपक्ष अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर उसका दबाव लगातार जारी है।

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