‘महिला सांसदों से करते हैं अपमानजनक व्यवहार...’ काकोली घोष का कल्याण बनर्जी पर बड़ा हमला, सख्त कार्रवाई की मांग

तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने पार्टी नेता और सांसद Kalyan Banerjee पर महिला सांसदों के साथ अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी कई बार सार्वजनिक रूप से महिला नेताओं को नीचा दिखाने वाली भाषा का इस्तेमाल कर चुके हैं। इस बयान के बाद टीएमसी के अंदरूनी विवाद और भी खुलकर सामने आ गए हैं।

May 28, 2026 - 11:23
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‘महिला सांसदों से करते हैं अपमानजनक व्यवहार...’ काकोली घोष का कल्याण बनर्जी पर बड़ा हमला, सख्त कार्रवाई की मांग

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने खुलकर पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। काकोली घोष ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी महिला सांसदों और महिला नेताओं के साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं और कई मौकों पर उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि ऐसे व्यवहार पर तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

दरअसल, यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब काकोली घोष ने पार्टी के भीतर महिलाओं के सम्मान और उनकी राजनीतिक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता लगातार महिला सांसदों को अपमानित करेगा और पार्टी चुप रहेगी, तो इससे गलत संदेश जाएगा। काकोली घोष का कहना है कि राजनीति में महिलाओं को बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए और किसी भी तरह की अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

काकोली घोष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी पहले भी कई महिला नेताओं को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी बैठकों और सार्वजनिक चर्चाओं के दौरान उनका व्यवहार कई बार असहज और अपमानजनक रहा है। काकोली घोष का कहना है कि उन्होंने यह मुद्दा पहले भी पार्टी मंच पर उठाया था, लेकिन उस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि टीएमसी के भीतर बढ़ती गुटबाजी का हिस्सा भी है। हाल के दिनों में काकोली घोष दस्तिदार लगातार पार्टी नेतृत्व और संगठन को लेकर नाराजगी जाहिर करती रही हैं। उन्होंने संगठन में बढ़ते हस्तक्षेप, आंतरिक लोकतंत्र की कमी और नेताओं के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए थे।

कल्याण बनर्जी पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा को लेकर भी कथित तौर पर तीखी और व्यक्तिगत टिप्पणियां की थीं, जिस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। विपक्षी दलों ने भी कई बार आरोप लगाया कि टीएमसी के अंदर महिला नेताओं को लेकर बयानबाजी की संस्कृति बनती जा रही है।

काकोली घोष ने कहा कि महिला सांसदों का अपमान केवल किसी व्यक्ति का मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा से जुड़ा विषय है। उन्होंने साफ कहा कि अगर पार्टी महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देती है तो उसे ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करनी चाहिए जो सार्वजनिक रूप से महिला नेताओं को निशाना बनाते हैं। उनके इस बयान के बाद पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि काकोली घोष की नाराजगी पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही थी। हाल ही में उन्होंने पार्टी के कई संगठनात्मक पदों से इस्तीफा भी दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी, भ्रष्टाचार और नेताओं के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर लगातार असंतोष सामने आ रहा है। कई नेता संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व शैली से नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे में काकोली घोष द्वारा सार्वजनिक रूप से कल्याण बनर्जी पर हमला करना पार्टी के अंदर गहराते संकट का संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, कल्याण बनर्जी की तरफ से इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन टीएमसी के अंदर इस बयानबाजी ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या महिला सांसदों के सम्मान के मुद्दे पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है या नहीं।

🔎 आखिर क्या था अपमानजनक व्यवहार?

काकोली घोष के मुताबिक, कल्याण बनर्जी कई मौकों पर महिला सांसदों के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर चुके हैं जिसे उन्होंने “अपमानजनक और असम्मानजनक” बताया। इससे पहले भी महुआ मोइत्रा को लेकर कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों पर विवाद हो चुका है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर निजी और तंज भरे शब्दों का इस्तेमाल किया था। काकोली घोष का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से महिला नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचता है और राजनीति में महिलाओं के लिए गलत माहौल बनता है।

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