“IED में लगाया सिम, एक कॉल और हुआ धमाका…”: जालंधर ब्लास्ट केस में आरोपी का हाईटेक तरीका देख चौंकी जांच एजेंसियां

Jalandhar में हुए IED ब्लास्ट मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों ने विस्फोटक डिवाइस में सिम कार्ड का इस्तेमाल किया और एक कॉल के जरिए धमाका किया गया। इस हाईटेक मॉड्यूल और प्लानिंग को देखकर सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान हैं। मामले की जांच अब और तेज कर दी गई है।

May 14, 2026 - 10:51
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“IED में लगाया सिम, एक कॉल और हुआ धमाका…”: जालंधर ब्लास्ट केस में आरोपी का हाईटेक तरीका देख चौंकी जांच एजेंसियां

Jalandhar में हुए IED ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों को चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने विस्फोटक डिवाइस को एक्टिव करने के लिए सिम कार्ड और मोबाइल कॉल तकनीक का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि जैसे ही कॉल की गई, IED में धमाका हो गया। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है।

जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से पूरी साजिश को अंजाम दिया। IED में मोबाइल सर्किट और सिम कार्ड फिट किया गया था ताकि दूर बैठकर भी धमाका किया जा सके। एजेंसियों का कहना है कि यह तरीका सामान्य अपराधियों के बजाय प्रशिक्षित मॉड्यूल की ओर इशारा करता है। यही वजह है कि अब इस मामले को बेहद संवेदनशील मानकर जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि आरोपियों को तकनीकी सहायता कहां से मिली। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस्तेमाल किए गए उपकरण बाजार में आसानी से उपलब्ध थे, लेकिन उन्हें जिस तरीके से जोड़ा गया, वह पेशेवर प्लानिंग को दर्शाता है। एजेंसियों को शक है कि आरोपियों को पहले से तकनीकी ट्रेनिंग दी गई हो सकती है।

मामले की जांच में मोबाइल नेटवर्क डेटा, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रैकिंग का सहारा लिया जा रहा है। जांच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमाके के समय किस नंबर से कॉल की गई थी और वह नंबर कहां से ऑपरेट हुआ। इसके साथ ही संदिग्धों के संपर्कों और सोशल मीडिया गतिविधियों को भी खंगाला जा रहा है।

घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने कई संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी भी की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अपराध और आतंकी गतिविधियों के तरीके भी बदल रहे हैं। पहले जहां टाइमर या मैनुअल ट्रिगर का इस्तेमाल होता था, वहीं अब मोबाइल नेटवर्क आधारित एक्टिवेशन सिस्टम का उपयोग बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

जालंधर IED ब्लास्ट मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। पंजाब समेत कई राज्यों में संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं।

राजनीतिक स्तर पर भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता और तेजी से आगे बढ़ रही है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक साबित हो सकता है। जांच एजेंसियां अब साइबर और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में लगी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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