पक्के दोस्त पर आई आंच, तो डटकर खड़ा हो गया भारत; अफगानिस्तान की मदद से पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी

पाकिस्तान द्वारा अफगान नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई और बड़े पैमाने पर निर्वासन के बीच भारत ने दोस्ती निभाते हुए अफगानिस्तान को मानवीय सहायता भेजी है। भारत के इस कदम को क्षेत्रीय कूटनीति में अहम माना जा रहा है, जबकि पाकिस्तान की नीतियों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

Jul 14, 2026 - 10:41
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पक्के दोस्त पर आई आंच, तो डटकर खड़ा हो गया भारत; अफगानिस्तान की मदद से पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी

भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह केवल रणनीतिक साझेदारियों की बात नहीं करता, बल्कि मुश्किल समय में अपने मित्र देशों के साथ मजबूती से खड़ा भी रहता है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान में रह रहे हजारों अफगान नागरिकों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उनके सामने मानवीय संकट गहराता जा रहा है, भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए आगे बढ़कर एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली ने जरूरतमंद अफगान नागरिकों के लिए मानवीय सहायता सामग्री भेजकर यह संदेश दिया है कि संकट की घड़ी में वह अपने मित्र देशों का साथ नहीं छोड़ता।

पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान में अवैध प्रवासियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। इस कार्रवाई का सबसे अधिक असर अफगान नागरिकों पर पड़ा है। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार, जो वर्षों से पाकिस्तान में रह रहे थे, उन्हें वापस अफगानिस्तान भेजा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण हजारों लोगों को अपने घर, रोजगार और आजीविका से हाथ धोना पड़ा है। कई परिवार बिना पर्याप्त संसाधनों के अफगानिस्तान लौटे हैं, जहां पहले से ही आर्थिक और मानवीय चुनौतियां मौजूद हैं।

ऐसे हालात में भारत ने अफगानिस्तान के लोगों की सहायता के लिए खाद्यान्न, आवश्यक दवाइयां और अन्य राहत सामग्री भेजी है। भारत का कहना है कि यह पूरी तरह मानवीय सहायता है और इसका उद्देश्य संकट से जूझ रहे आम नागरिकों की मदद करना है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान के विकास और पुनर्निर्माण में योगदान देता रहा है। सड़क निर्माण, बिजली परियोजनाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और संसद भवन जैसे कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों में भारत की भूमिका पहले भी अहम रही है। यही वजह है कि अफगानिस्तान के लोगों के बीच भारत को एक विश्वसनीय मित्र के रूप में देखा जाता है।

विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि भारत का यह कदम केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसकी मानवीय और जिम्मेदार विदेश नीति का भी हिस्सा है। भारत ने हमेशा यह कोशिश की है कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिले। प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध या आर्थिक संकट के समय भी भारत कई देशों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। इसी नीति के तहत अफगानिस्तान के लिए भेजी गई सहायता को भी देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान की अफगान नागरिकों को लेकर अपनाई गई नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने भी यह चिंता जताई है कि बड़े पैमाने पर किए जा रहे निर्वासन से हजारों परिवारों के सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

भारत के इस मानवीय कदम को दक्षिण एशिया की कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नई दिल्ली यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि वह अपने पड़ोसी देशों के लोगों के साथ मानवीय आधार पर सहयोग जारी रखेगा। भारत की "पड़ोसी पहले" और "मानव-केंद्रित कूटनीति" की नीति इसी सोच को दर्शाती है। यही कारण है कि अफगानिस्तान के कठिन दौर में भी भारत ने सहायता का हाथ बढ़ाया है।

अफगानिस्तान में मौजूदा आर्थिक हालात पहले से ही चुनौतीपूर्ण हैं। लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी, खाद्य संकट और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी के कारण आम लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान से लौट रहे हजारों अफगान नागरिकों के पुनर्वास की चुनौती और भी बड़ी हो गई है। भारत द्वारा भेजी गई राहत सामग्री इस संकट से जूझ रहे लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा मानी जा रही है।

भारत और अफगानिस्तान के संबंध दशकों पुराने हैं और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक रिश्ते हमेशा मजबूत रहे हैं। भारत ने कभी भी अफगान जनता से अपने संबंध कमजोर नहीं होने दिए। बदलते राजनीतिक हालात के बावजूद भारत ने समय-समय पर मानवीय सहायता, चिकित्सा सामग्री, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुएं भेजकर अपना सहयोग जारी रखा है। यही वजह है कि अफगानिस्तान के आम लोगों के बीच भारत के प्रति सकारात्मक भावना देखने को मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम क्षेत्र में उसकी सकारात्मक छवि को और मजबूत करेगा। जहां एक ओर पाकिस्तान की निर्वासन नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत की मानवीय सहायता को एक जिम्मेदार और संवेदनशील राष्ट्र की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भारत ने अपने आधिकारिक रुख में स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी देश की आलोचना करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाना है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय किस तरह सहयोग करता है। भारत पहले भी कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि वह अफगान जनता के साथ खड़ा रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराएगा। वर्तमान घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भारत की विदेश नीति केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवीय मूल्यों और क्षेत्रीय स्थिरता को भी समान महत्व दिया जाता है।

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