'गाड़ी सीज कर देंगे...' फर्जी SDM, RTO और माइनिंग अफसर बनकर वसूली करने वाला गैंग गिरफ्तार, 4 आरोपी दबोचे
उत्तर प्रदेश के बांदा में पुलिस ने चार ऐसे शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो खुद को SDM, RTO और माइनिंग विभाग का अधिकारी बताकर वाहन चालकों को धमकाते थे। आरोपी गाड़ी सीज करने और चालान की धमकी देकर अवैध वसूली करते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से कार समेत कई सामान बरामद किए हैं।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने ऐसे चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताकर वाहन चालकों से अवैध वसूली कर रहे थे। आरोपियों का तरीका इतना पेशेवर था कि पहली नजर में कोई भी उन्हें असली सरकारी अधिकारी समझ बैठता था। वे कभी खुद को SDM, कभी RTO अधिकारी तो कभी माइनिंग विभाग का अधिकारी बताकर सड़कों पर वाहनों को रोकते और कार्रवाई की धमकी देकर मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है।
पुलिस के अनुसार आरोपी खासतौर पर ई-रिक्शा चालकों, छोटे व्यवसायिक वाहनों और अन्य वाहन चालकों को अपना निशाना बनाते थे। वे वाहन रोकने के बाद रौबदार अंदाज में खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताते और कहते, "गाड़ी सीज कर देंगे", "ओवरलोडिंग का मामला बनेगा", "खनन का केस दर्ज होगा" या "भारी जुर्माना लगेगा"। डर के कारण कई चालक मौके पर ही नकद पैसे दे देते थे ताकि किसी कानूनी कार्रवाई से बच सकें। यही डर इस गैंग की सबसे बड़ी ताकत बन गया था।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों जैसी कार्यशैली अपनाई हुई थी। वे एक चार पहिया वाहन में घूमते थे, लोगों को रोकते थे और अधिकारपूर्ण लहजे में पूछताछ करते थे। कई बार वे खुद को माइनिंग विभाग की टीम बताते थे तो कभी RTO या SDM का नाम लेकर कार्रवाई की धमकी देते थे। इससे आम लोग उनके झांसे में आसानी से आ जाते थे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने लंबे समय से इस तरीके से अवैध वसूली का नेटवर्क बना रखा था।
इस गिरोह की शिकायतें लगातार पुलिस तक पहुंच रही थीं। वाहन चालकों ने बताया कि कुछ लोग खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उनसे पैसे मांगते हैं और पैसा नहीं देने पर वाहन जब्त करने या मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देते हैं। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक चार पहिया वाहन और अन्य सामान भी बरामद किया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वसूली के दौरान किया जाता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस गैंग के तार किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं और क्या उन्होंने अन्य जिलों में भी इसी तरह लोगों से ठगी और अवैध वसूली की है।
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम वसूली। अधिकारियों का मानना है कि कई पीड़ित अभी भी सामने नहीं आए हैं क्योंकि वे कानूनी प्रक्रिया या झंझट से बचने के लिए शिकायत दर्ज नहीं कराते। इसी वजह से ऐसे गिरोह लंबे समय तक सक्रिय रह पाते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर सड़क पर रोकता है और पैसे की मांग करता है तो उसकी पहचान अवश्य सत्यापित करें। किसी भी अधिकारी द्वारा मौके पर नकद वसूली की मांग किए जाने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित विभाग को सूचना दें। अधिकारियों ने कहा कि वास्तविक सरकारी कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया होती है और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे नहीं देने चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग कर अपराधी किस तरह आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। सड़क पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी भी है कि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित अधिकारी की पहचान और वैधता की जांच करना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं और क्या इनके पास नकली पहचान पत्र, दस्तावेज या अन्य सरकारी सामान भी मौजूद थे। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0