अमरनाथ यात्रा के लिए अभेद्य सुरक्षा चक्रव्यूह की तैयारी: गृह मंत्री अमित शाह आज करेंगे हाई-लेवल बैठक, पूरे यात्रा कॉरिडोर को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित करने सहित कई बड़े फैसलों पर मुहर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज नई दिल्ली में आगामी वार्षिक श्री अमरनाथ जी यात्रा की सुरक्षा और रणनीतिक तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। 3 जुलाई से शुरू होने वाली इस 57 दिवसीय पवित्र तीर्थयात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना, अर्धसैनिक बलों (CAPF) और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हो रहे हैं। इस बार सुरक्षा को और कड़ा करते हुए पूरे यात्रा कॉरिडोर को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित करने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं।
आगामी 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाली पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। इसी कड़ी में आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हाई-लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक को आगामी 57 दिवसीय यात्रा की तैयारियों के अंतिम प्रशासनिक और सुरक्षा ऑडिट (Final Security Audit) के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, थल सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) और देश की प्रमुख खुफिया एजेंसियों (IB और RAW) के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। इस उच्च स्तरीय विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य दक्षिण कश्मीर के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल, दोनों ही यात्रा मार्गों पर एक अचूक और बहुस्तरीय सुरक्षा ग्रिड (Multi-layered Security Grid) को अंतिम रूप देना है।
इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा इसलिए भी विशेष है क्योंकि प्रशासन ने सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाते हुए 1 जुलाई से यात्रा संपन्न होने तक दोनों रूटों सहित पूरे अमरनाथ यात्रा कॉरिडोर को 'नो-फ्लाई ज़ोन' (No-Fly Zone) घोषित करने का निर्णय लिया है। आज की बैठक में गृह मंत्री सुरक्षा बलों की तैनाती, आतंकवाद विरोधी अभियानों की स्थिति, काफिले (Convoy) की सुरक्षा, उन्नत निगरानी प्रणालियों (Advanced Surveillance Systems), एंटी-ड्रोन तकनीक और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार किए गए 'कंटिनजेंसी प्लान' की गहन समीक्षा कर रहे हैं।
अभेद्य सुरक्षा ग्रिड और 'नो-फ्लाई ज़ोन' की रणनीतिक घेराबंदी
पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच होने वाली इस यात्रा को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने इस बार जमीन से लेकर आसमान तक कड़ा पहरा लगाने की योजना बनाई है। पूरे कॉरिडोर को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित किए जाने के बाद आसमान से होने वाले किसी भी संभावित खतरे या संदिग्ध ड्रोन एक्टिविटी को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाएगा। बैठक में गृह मंत्री को सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे 'एरिया डोमिनेशन' और रूट सैनिटाइजेशन (रास्तों की जांच और सफाई) अभियानों की प्रगति से अवगत कराया जा रहा है। इसके साथ ही, यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के काफिले को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष सुरक्षा वाहनों और बुलेटप्रूफ लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था पर भी अंतिम निर्णय लिया जा रहा है।
RFID ट्रैकिंग और आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
सुरक्षा के साथ-साथ हर एक श्रद्धालु की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए इस साल भी RFID (Radio Frequency Identification) आधारित ट्रैकिंग सिस्टम को अनिवार्य और अधिक उन्नत बनाया गया है। गृह मंत्री की इस बैठक में इस बात की समीक्षा की जा रही है कि नियंत्रण कक्षों (Control Rooms) के माध्यम से यात्रियों की आवाजाही को कैसे ट्रैक किया जाएगा। इसके अलावा, पूरे यात्रा मार्ग, संवेदनशील मोड़ों और बेस कैंपों (बालटाल व नुनवान) पर अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों और नाइट विजन उपकरणों से लैस ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम सूचनाओं के आदान-प्रदान (Intelligence Sharing) को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत कमान केंद्र (Integrated Command Center) भी सक्रिय किया गया है।
आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं और नागरिक सुविधाएं भी एजेंडे में शामिल
लगभग 3,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा की कठिन यात्रा में मौसम की अनिश्चितता हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। इसलिए आज की उच्च स्तरीय बैठक में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यापक आपदा प्रबंधन तैयारियों पर भी चर्चा हो रही है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों की तैनाती, ऑक्सीजन बूथों की स्थापना, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं, टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क की मजबूती और बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण नागरिक इंतजामों की भी समीक्षा की जा रही है। प्रशासन को इस वर्ष अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए गृह मंत्री सभी विभागों को समय रहते बुनियादी ढांचे का काम पूरा करने और आपसी समन्वय से काम करने के सख्त निर्देश दे रहे हैं।
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