जिबूती से यमन जा रही प्रवासियों की नाव पलटी, 15 बच्चों समेत 139 की मौत; 84 अब भी लापता

जिबूती से यमन जा रही 305 प्रवासियों से भरी नाव समुद्र में पलट गई। हादसे में 15 बच्चों समेत 139 लोगों की मौत हो गई, जबकि 84 लोग लापता हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है।

Oct 12, 2026 - 10:44
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जिबूती से यमन जा रही प्रवासियों की नाव पलटी, 15 बच्चों समेत 139 की मौत; 84 अब भी लापता

जिबूती: पूर्वी अफ्रीका से यमन की ओर जा रहे प्रवासियों से भरी एक नाव समुद्र में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 139 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 15 बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, 84 लोग अब भी लापता हैं। नाव में करीब 305 लोग सवार थे। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?

यह दुर्घटना 8 और 9 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात जिबूती के तटीय इलाके में हुई। नाव जिबूती से यमन की ओर जा रही थी। जीवित बचे लोगों के अनुसार, नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे और समुद्र में निकलने के कुछ ही समय बाद वह डूबने लगी।

हादसा जिबूती के ओबॉक बंदरगाह शहर के उत्तर में गुहेरे के पास हुआ। नाव में सवार अधिकांश लोग इथियोपिया के नागरिक बताए गए हैं, जो बेहतर रोजगार और जीवन की तलाश में खतरनाक समुद्री रास्ते से यात्रा कर रहे थे।  

139 लोगों की मौत, 84 का अब भी इंतजार

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, हादसे में कम से कम 139 लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों में 15 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा, 84 लोग अब भी लापता हैं, जबकि करीब 82 लोग इस हादसे में जीवित बच पाए।

मृतकों की आधिकारिक संख्या में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिनके शव स्थानीय अधिकारियों ने बरामद कर दफनाए हैं। कुछ शवों को अन्य प्रवासियों ने स्वयं दफनाया था, जिनकी पुष्टि होने के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है।

इस वजह से आशंका है कि हादसे में जान गंवाने वालों की वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़े से अधिक हो सकती है।  

राहत और बचाव अभियान जारी

हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल समुद्र में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। जीवित बचे लोगों को ओबॉक स्थित सहायता केंद्र पहुंचाया गया है, जहां उन्हें चिकित्सा सुविधा, भोजन और मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है।

कई जीवित बचे लोग सदमे में हैं। कुछ लोगों को अपने परिजनों की मौत की सूचना मिल चुकी है, जबकि अन्य अब भी अपनों के सुरक्षित होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।  

आखिर क्यों जान जोखिम में डाल रहे हैं प्रवासी?

अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र से हर साल हजारों लोग जिबूती के रास्ते यमन पहुंचने की कोशिश करते हैं। उनका लक्ष्य अक्सर खाड़ी देशों में रोजगार हासिल करना और बेहतर आर्थिक अवसर तलाशना होता है।

लेकिन यह समुद्री मार्ग बेहद खतरनाक है। भीड़भाड़ वाली नावें, खराब सुरक्षा व्यवस्था, समुद्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां और मानव तस्करी जैसे खतरे प्रवासियों की जान जोखिम में डालते हैं। यमन में जारी संघर्ष के बावजूद लोग इस रास्ते से यात्रा करने को मजबूर हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इस मार्ग पर 900 से अधिक प्रवासियों की मौत हुई या वे लापता हो गए थे। 

सुरक्षित प्रवासन के रास्ते उपलब्ध कराने की मांग

इस हादसे ने एक बार फिर अवैध और असुरक्षित प्रवासन के गंभीर मानवीय संकट को उजागर किया है। बेहतर रोजगार, सुरक्षा और जीवन की तलाश में निकलने वाले लोगों को अक्सर ऐसे रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उनकी जान को बड़ा खतरा होता है।

विशेषज्ञों और मानवीय सहायता संगठनों का जोर इस बात पर है कि प्रवासियों के लिए सुरक्षित और कानूनी रास्ते उपलब्ध कराए जाएं, ताकि लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्री यात्रा न करनी पड़े।

निष्कर्ष: जिबूती से यमन जा रही नाव का पलटना एक बड़ी मानवीय त्रासदी बन गया है। 139 लोगों की मौत, 84 लोगों के लापता होने और कई परिवारों के बिछड़ने की इस घटना ने खतरनाक प्रवासन मार्गों पर सुरक्षा के सवाल फिर खड़े कर दिए हैं।

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