Stock Market Today: तूफानी शुरुआत के बाद Sensex-Nifty में गिरावट, आखिर क्यों पलटा बाजार?
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन शुरुआती बढ़त ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। सेंसेक्स और निफ्टी कुछ ही समय में फिसलकर लाल निशान में पहुंच गए। शुक्रवार की जोरदार रिकवरी के बाद निवेशकों को बाजार से उम्मीदें थीं, लेकिन रुपये, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता ने तेजी पर दबाव डाल दिया।
बाजार खुलते ही तेजी, फिर क्यों बदला रुख?
सोमवार सुबह बाजार में खरीदारी का माहौल दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 300 अंकों की बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी भी हरे निशान में कारोबार शुरू करने में सफल रहा। लेकिन शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख सूचकांकों की बढ़त गायब हो गई।
सुबह करीब 10:12 बजे सेंसेक्स 72,277.23 के स्तर पर था, जो पिछले बंद के मुकाबले 0.26 प्रतिशत नीचे था। वहीं, निफ्टी 50 गिरकर 22,493.25 पर आ गया और इसमें 0.13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के सामने सवाल खड़ा कर दिया कि क्या बाजार में आई तेजी टिकाऊ है या अभी भी गिरावट का खतरा बना हुआ है।
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
1. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रही है। जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर शेयर बेचते हैं, तो प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ सकती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी इस दबाव को कुछ हद तक कम कर सकती है।
2. रुपये और RBI के फैसलों पर नजर
भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को सहारा देने और डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठाए हैं। इन उपायों के बाद रुपये में सुधार देखा गया, लेकिन निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि इन फैसलों का बाजार और अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा।
3. कच्चे तेल की कीमतें अब भी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बावजूद भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने हुए थे। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है।
4. महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के नतीजों का इंतजार
निवेशकों की नजर आने वाले महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी है। इनसे ब्याज दरों, कंपनियों की कमाई और बाजार की आगे की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। इसी वजह से निवेशक बड़े दांव लगाने के बजाय सावधानी बरत रहे हैं।
कौन-से शेयर और सेक्टर रहे चर्चा में?
शुरुआती कारोबार में बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव दिखाई दिया, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा समूह की कंपनियों और अन्य बड़े शेयरों में होने वाली खरीद-बिक्री पर भी निवेशकों की नजर रही। हालांकि, किसी एक कंपनी के शेयर में तेजी आने का अर्थ यह नहीं है कि पूरा बाजार भी तेजी में रहेगा।
क्या शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट आएगी?
फिलहाल बाजार की दिशा को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार रिकवरी हुई थी, लेकिन सोमवार को शुरुआती बढ़त का खत्म होना बताता है कि निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है।
आगे बाजार की चाल मुख्य रूप से विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी।
शेयर बाजार में सोमवार की शुरुआत भले ही शानदार रही, लेकिन कुछ ही समय में तेजी कमजोर पड़ गई। सेंसेक्स और निफ्टी की यह चाल बताती है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल शुरुआती तेजी देखकर फैसला न लें और निवेश से पहले जोखिम का आकलन करें।
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