Apple Watch का नया हेल्थ फीचर लॉन्च: अब खर्राटों से जुड़ी गंभीर बीमारी का चलेगा पता
Apple ने अपनी Apple Watch के लिए नया हेल्थ फीचर लॉन्च किया है, जो यूजर्स के खर्राटों और सांस लेने के पैटर्न को मॉनिटर कर स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी के संकेत पहचान सकेगा। यह फीचर हेल्थ टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple ने अपनी स्मार्टवॉच Apple Watch में एक नया हेल्थ फीचर जोड़ने की घोषणा की है, जो खर्राटों और नींद के दौरान सांस लेने में होने वाली गड़बड़ियों को पहचानने में मदद करेगा। कंपनी का दावा है कि यह फीचर स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेतों का पता लगाने में सक्षम होगा।
स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती है। कई लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चल पाता। लगातार खर्राटे, दिनभर थकान रहना, नींद पूरी न होना और सिरदर्द इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक इसका इलाज न होने पर दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
नई तकनीक के जरिए Apple Watch यूजर्स की नींद के दौरान शरीर की हलचल, सांस लेने के पैटर्न और ऑक्सीजन लेवल जैसे संकेतों को ट्रैक करेगी। अगर सिस्टम को कोई असामान्य गतिविधि दिखाई देती है तो यूजर को नोटिफिकेशन मिलेगा कि उन्हें मेडिकल जांच करवानी चाहिए।
कंपनी के मुताबिक यह फीचर एडवांस सेंसर और मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह लगातार डेटा एनालिसिस करके यूजर की स्लीप क्वालिटी का मूल्यांकन करेगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की टेक्नोलॉजी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का जल्दी पता लगाने में मदद कर सकती है।
Apple ने बताया कि यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जो लंबे समय से खर्राटों की समस्या से परेशान हैं लेकिन डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। अब यूजर घर बैठे अपनी हेल्थ कंडीशन के शुरुआती संकेत समझ सकेंगे।
टेक इंडस्ट्री में इसे वियरेबल हेल्थ डिवाइस सेक्टर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टवॉच केवल फिटनेस ट्रैकर तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि हार्ट रेट मॉनिटरिंग, ECG, ब्लड ऑक्सीजन ट्रैकिंग और फॉल डिटेक्शन जैसे फीचर्स के जरिए हेल्थकेयर का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार खर्राटे आते हैं और नींद के दौरान सांस रुकने जैसी समस्या होती है, तो यह फीचर समय रहते अलर्ट देकर गंभीर स्थिति से बचाने में मदद कर सकता है। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फीचर मेडिकल डायग्नोसिस का विकल्प नहीं है, बल्कि केवल शुरुआती चेतावनी देने वाला टूल है।
नए अपडेट के बाद यूजर्स अपने iPhone के हेल्थ ऐप में विस्तृत स्लीप रिपोर्ट भी देख सकेंगे। इसमें नींद की गुणवत्ता, सांस लेने की गतिविधि और संभावित जोखिम की जानकारी मिलेगी।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि हेल्थ-फोकस्ड फीचर्स के कारण Apple Watch की मांग और बढ़ सकती है। खासकर फिटनेस और हेल्थ को लेकर जागरूक लोगों के बीच यह फीचर काफी लोकप्रिय हो सकता है।
भारत समेत दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग स्लीप डिसऑर्डर की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह नई तकनीक हेल्थ मॉनिटरिंग को और आसान बना सकती है। डिजिटल हेल्थ सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह कदम Apple को अन्य कंपनियों से अलग पहचान दिला सकता है।
फिलहाल यूजर्स इस फीचर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में स्मार्टवॉच केवल गैजेट नहीं बल्कि पर्सनल हेल्थ असिस्टेंट की भूमिका निभाएंगी।
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